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बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के हिवरखेड़ी गांव के शासकीय हाईस्कूल में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ध्वजारोहण के बाद पाइप से एक सर्प निकलने के कारण कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। यहां से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित हिवरखेड़ी गांव में ग्रामीणों ने बच्चों की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया।
तिरंगा लहराने के कुछ ही देर बाद पाइप के ऊपरी हिस्से से एक सर्प भी दिखाई दिया। कुछ देर बाद वह सर्प पाइप के अंदर ही चला गया। ग्रामीणों के अनुसार सर्प देखकर कुछ छात्राएं भयभीत भी हो गयीं। वहीं ग्रामीण सतर्क हो गए। आज स्वतंत्रता दिवस के साथ नागपंचमी का पर्व भी है।
::/fulltext::जिला अस्पताल में शुक्रवार सुबह एक बार फिर अंधविश्वास का खेल सामने आया।
मंदसौर। शहर के जिला अस्पताल में शुक्रवार सुबह एक बार फिर अंधविश्वास का खेल सामने आया। राजस्थान के बूंदी के पास स्थित सत्तूर गांव से कुछ लोग अपने परिजन की आत्मा लेने जिला अस्पताल पहुंचे। आपको पढ़कर आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन ये सही है, उन्होंने काफी देर तक ओपीडी में पूजा पाठ भी की। जैसे ही अस्पताल के कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने सभी को बाहर निकाल दिया। परिजनों का कहना है कि सत्तूर निवासी अमरलाल की 9 साल पहले मंदसौर जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। आज वे इसी उन्हीं की आत्मा लेने के लिए यहां आए हैं।
ऐसा नहीं है जिला अस्पताल में अंधविश्वास का यह खेल पहली बार हुआ हो, इसके पहले भी मई महीने में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से एक परिवार यहां आया था। दिनेश पिता शांतिलाल जायसवाल फरवरी-17 में महू-नीमच राजमार्ग पर नयाखेड़ा के समीप सड़क हादसे में घायल हो गया था। उसे गंभीर घायल अवस्था में जिला अस्पताल लाए थे। यहां मुख्य द्वार के समीप ही उसकी मौत हो गई थी। एक साल बाद उसके 10-12 परिजन अस्पताल पहुंचे और तंत्र-मंत्र करने के बाद अग्नि की ज्योत के साथ घर लेकर रवाना हुए थे।
नीमच जिले के ग्राम कुंडालिया निवासी कारूलाल बारेठ की मृत्यु 35 वर्ष पहले जिला अस्पताल में हुई थी। परिवार के सदस्य राजू बारेठ का कहना था कि हमारे पूर्वज कारूलाल की मृत्यु के बाद उनकी आत्मा यहीं रह गई थी। 10 मई को शाम 5 बजे परिजन जिला अस्पताल आए। गेट पर ही बैठकर महिला-पुरुषों ने अपना कार्य किया। तंत्र क्रिया के साथ एक व्यक्ति मंत्र पढ़ता रहा। यह देखते ही भीड़ जमा हो गई। बहुत देर तक तंत्र-मंत्र चलते रहे। बाद में परिजन एक वाहन से चले गए।
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