Owner/Director : Anita Khare
Contact No. : 9009991052
Sampadak : Shashank Khare
Contact No. : 7987354738
Raipur C.G. 492007
City Office : In Front of Raj Talkies, Block B1, 2nd Floor, Bombey Market GE Road, Raipur C.G. 492001
नई दिल्ली : कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी अगले एक-दो दिन में राजस्थान के मुख्यमंत्री के बारे में फैसला करेंगी.उन्होंने सोनिया के आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष अगले एक या दो दिन में राजस्थान के मुख्यमंत्री के बारे में फैसला करेंगी.' इससे पहले, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया से मुलाक़ात की थी और जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक नहीं हो पाने की घटना के लिए उनसे माफी मांगी थी. उन्होंने यह भी कहा कि वह अब अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे. सोनिया गांधी के आवास ‘10 जनपथ' पर उनसे मुलाकात के बाद गहलोत ने यह भी कहा कि उनके मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के बारे में फैसला सोनिया गांधी करेंगी.
अशोक गहलोत ने यहां संवाददाताओं से कहा,‘‘मैं पिछले 50 वर्षों से कांग्रेस का वफादार सिपाही रहा हूं...जो घटना दो दिन पहले हुई उसने हम सबको हिलाकर रख दिया. मुझे जो दुख है वो मैं ही जान सकता हूं. पूरे देश में यह संदेश चला गया कि मैं मुख्यमंत्री बने रहना चाहता हूं इसलिए यह सब हो रहा है.''
गहलोत ने कहा, ‘‘ हमारी परंपरा है कि एक लाइन का प्रस्ताव पारित किया जाता है. दुर्भाग्य से ऐसी स्थिति बन गई कि प्रस्ताव पारित नहीं पाया. मैं मुख्यमंत्री हूं और विधायक दल का नेता हूं. यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया, इस बात का दुख मुझे हमेशा रहेगा. मैंने सोनिया जी से माफी मांगी है.''उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने तय किया है कि इस माहौल के अंदर अब चुनाव नहीं लड़ूंगा. यह मेरा फैसला है.''कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव पर राजस्थान में उत्पन्न राजनीतिक संकट की छाया पड़ी है. गत रविवार की शाम जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन गहलोत समर्थक विधायक इसमें शामिल नहीं हुए थे.पार्टी पर्यवेक्षकों मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन ने इसे मंगलवार को ‘घोर अनुशासनहीनता' करार दिया था और गहलोत के करीबी तीन नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी. अनुशंसा के कुछ देर बाद ही पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की ओर से इन्हें ‘कारण बताओ नोटिस' जारी कर दिए गए.
नई दिल्ली: राजस्थान कांग्रेस में चल रहे बवाल के बीच सूत्रों से खबर आ रही है सीएम अशोक गहलोत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी मांगी है. सूत्रों के अनुसार अशोक गहलोत ने मल्लिकार्जुन खड़गे से कहा है कि विधायकों के विद्रोह से उनका कोई भी लेना देना नहीं है. उधर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार शाम को विधायक दल की बैठक में MLA's के ना पहुंचने को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे से लिखित में जवाब मांगा है. बता दें कि पार्टी हाईकमान ने रविवार शाम सात बजे जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई थी.
सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राज्य के नए सीएम के नाम पर फैसला हो सकता था. लेकिन इस बैठक से ठीक पहले गहलतो कैंप के विधायक शांति धारीवाल जिन्हें सीएम गहलोत का करीबी बताया जाता है के घर पर मिले. और इस बैठक के बाद पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश की कि राज्य का अगला सीएम उनके कैंप से ही होना चाहिए. सूत्रों के अनुसार गहलोत कैंप के 90 से ज्यादा विधायक अपना बात ना मानने पर इस्तीफा तक देने को तैयार थे.
राजस्थान कांग्रेस के अंदर खाने चल रही इस खींचतान को देखते हुए आनन-फानन में दिल्ली से भेजे गए मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को विधायक दल की बैठक को टालना पड़ा. इस पूरे घटना क्रम को लेकर कांग्रेस हाईकमान खासा नाराज है. पार्टी ने विधायक दल की बैठक से पहले MLA's की बैठक को अनुशासनहिनता बताया है. इस घटना को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के प्रभारी अजय माकन ने आज पत्रकारों से बात की. उन्होंने इस दौरान कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को मैने और खड़गे जी ने राजस्थान की स्थिति से अवगत कराया है.
माकन ने आगे कहा कि विधायक दल की बैठक को लेकर सोनिया गांधी का निर्देश था कि हम हर एक विधायक से उनकी राय जानकर, उन्हें अवगत कराएं. जब फैसला सबसे बात करने के बाद ही लिया जाता तो इसे लेकर हंगामा करना कहीं से भी सही नहीं है.
नई दिल्ली: राजस्थान के टोंक जिले की 18 वर्षीय अंजलि वैष्णव 13 साल की थीं, जब उन्हें स्कूल में लंच ब्रेक के दौरान पहली बार पीरियड्स हुए. अनजाने में, अंजलि की स्कर्ट पर दाग लगा गया और जिसके बाद उसे घर वापस जाने के लिए कहा गया. घर पहुंचने पर, अंजलि की मां ने उसे पीरियड्स के बारे में डिटेल में बताया और उसे एक सैनिटरी पैड दिया. लेकिन, न तो स्कूल में और न ही घर पर अंजलि को पीरियड्स कैसे और क्यों होता है और किसी की बॉडी में होने वाले चेंज से कैसे निपटना चाहिए, इस बारे में कोई जानकारी दी की गई थी.
इसी तरह, राजस्थान के टोंक जिले के दरदा हिंद गांव की 17 वर्षीय निशा चौधरी को जब पहली बार पीरियड आए, तो उन्हें बताया गया कि हर लड़की को ये हो जाता है और इसमें डरने की कोई बात नहीं है. निशा की मां ने उन्हें एक कपड़ा दिया, जो कि पीरियड्स को मैनेज करने का हाइजीनिक तरीका नहीं था.
12वीं क्लास की स्टूडेंट निशा अपने पैरेंट्स और एक छोटे भाई के साथ रहती है. कपड़े के इस्तेमाल के अपने एक्सपीरियंस के बारे में बात करते हुए निशा ने कहा,
मेरी मां ने अपने पीरियड्स के दौरान हमेशा कपड़े के टुकड़े का इस्तेमाल किया था लेकिन मुझे वह कपड़ा बहुत अजीब लगा. और मुझे इसका एहसास तब हुआ जब मैंने सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करना शुरू किया.
यहां तक कि पीरियड्स को लेकर अंजलि का रिस्पॉन्स भी बदल गया है. अब वह जानती है कि पीरियड्स के दौरान क्यों और कैसे हाइजीन बनाए रखना है और अब वह गांव की अन्य लड़कियों को भी शिक्षित करती है. यह चेंज द यंग पीपल फाउंडेशन के समर्थन से पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में नारीवादी किशोर और युवा-नेतृत्व वाले (एफएवाईए) प्रोग्राम के कारण संभव हुआ है.
अक्टूबर 2018 से, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया राजस्थान के चार जिलों – बूंदी, करौली, डूंगरपुर और टोंक में FAYA प्रोग्राम चला रहा है – जिसके तहत यह किशोरों के लिए सेक्शूऐलिटी एजुकेशन पर स्कूल से बाहर सेशन आयोजित करता है. FAYA भी युवा लोगों को साथियों और परिवार के सदस्यों, समुदायों और राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नीति निर्माताओं और कार्यान्वयनकर्ताओं के साथ सेवाओं और अधिकारों तक पहुंच की वकालत करने के लिए ट्रेंड करता है.
FAYA प्रोजेक्ट के तहत, लोकल काउंसलर हैं जो यंग लोगों को व्यापक सेक्सुअल एजुकेशन देते हैं. 24 वर्षीय यमुना शर्मा टोंक जिले में काम करने वाली ऐसी ही एक सूत्रधार हैं. यमुना 2019 से पीएफआई से जुड़ी हुई है. अपने काम के किस्से सुनाते हुए यमुना ने कहा,
शुरू में लड़कियां बहाने बनाती थीं, जैसे हमारे पास काम है या हमारे पैरेंट्स बाहर जाने की इजाजत नहीं देते हैं और हमसे बात करने से मना कर देती हैं. फिर भी, हम उनसे मिलने जाते रहे और एक समय ऐसा भी आया जब किशोरों ने मुझे किसी न किसी सब्जेक्ट पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित करना शुरू कर दिया. जब हम ग्राउंड पर काम करते हैं, तो हम 15-20 लड़कियों का एक ग्रुप बनाते हैं और हर उस चीज़ के बारे में बात करते हैं जिससे वे कतराती हैं जैसे- रिप्रोडक्शन, इंटरल ऑर्गन और सेक्स.
यह पूछे जाने पर कि यंग गर्ल्स के बिहेव में इस बदलाव का क्या कारण है, यमुना ने कहा कि यह उनकी बॉडी के बारे में जानने की रुचि और जिज्ञासा थी. हालांकि, सेक्स के इर्द-गिर्द बातचीत ग्रामीणों के साथ अच्छी नहीं रही. एक घटना को याद करते हुए यमुना ने कहा,
एक बार मैं सेक्स पर एक सेशन आयोजित करने गई थी. गांव के एक प्राइवेट स्कूल के टीचर ने एक बार हमारी चर्चा सुनी और कहा, ‘आप इन बातों के बारे में खुलकर बात नहीं कर सकते, क्योंकि इससे बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा’. तब मैंने उन्हें बताया कि स्कूल की किताबों में भी रिप्रोडक्शन पर एक चैप्टर होता है, लेकिन दुर्भाग्य से, इसे अक्सर छोड़ दिया जाता है.
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के पांचवें दौर के अनुसार, राजस्थान में 84.1 प्रतिशत महिलाएं (15-24 वर्ष) पीरियड के दौरान सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों का उपयोग करती हैं. राज्य ने 2015-16 (एनएफएचएस-4) के बाद से स्वच्छता के तरीकों के उपयोग में भारी वृद्धि देखी है, 55.2 प्रतिशत महिलाओं ने हाइजीन पीरियड प्रोटेक्शन का इस्तेमाल किया था. जबकि राज्य में बदलाव आया है, पर जानकारी तक पहुंचने के संबंध में कलंक और वर्जनाएं अभी भी मौजूद हैं.
एक और मुद्दा जो यमुना जैसे सूत्रधार उठाते हैं, वह है पीरियड्स के आसपास के मिथक. इसमें पीरियड्स के दौरान अचार को न छूना या मंदिर में प्रवेश नहीं करना शामिल है. यमुना ने कहा,
जब तक मैं पीएफआई में शामिल नहीं हुई थी मैं भी इन बातों पर विश्वास करती थी. हम अचार का जार पकड़ने या पवित्र तुलसी के पौधे को छूने से बचते थे. हम लड़कियों को शिक्षित करने के लिए प्रैक्टिकल करते हैं और पेंटिंग और पोस्टर का उपयोग करते हैं.\
निशा के पिता का एक मेडिकल स्टोर है और तब भी, उन्हें पहले पीरियड प्रोडक्ट के रूप में कपड़ा दिया गया था. हालांकि, चीजें बदल गईं क्योंकि उनकी यमुना दीदी (बहन) ने उनसे स्वच्छता के बारे में बात की.
पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा ने इस तरह की परियोजना की आवश्यकता के बारे में बात करते हुए कहा,
किशोरावस्था एक ट्रांज़िशनल पीरियड के दौरान युवा अपने शरीर, मन और भावनाओं में परिवर्तन का अनुभव करते हैं. किशोरावस्था में पीरियड, कंसेप्शन, कॉन्ट्रासेप्शन और अन्य मुद्दों के बारे में सवाल मन में उठते रहते हैं जो सेक्शूऐलिटी के आसपास के कलंक के कारण आते हैं. FAYA प्रोग्राम का उद्देश्य युवाओं को खुद को व्यक्त करने और जज किए जाने के डर के बिना सवाल पूछने के लिए एक सुरक्षित जगह देता है.
अंजलि और निशा की कहानियां साबित करती हैं कि टारगेटिड एडवोकेसी और शिक्षा लाइव को बेहतर कर सकती है और भविष्य में बदलाव लाने वाला बना सकती है.
चंडीगढ़: पंजाब के अमृतसर में कथित तौर पर अवैध ड्रग्स के नशे में धुत एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के कुछ दिनों बाद, सिखों के इस पवित्र शहर से अब एक युवक का सड़क पर नशे में लड़खड़ाते वीडियो सामने आया है. अमृतसर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र के चमरंग रोड में शूट किए गए वीडियो में, नशे में धुत आदमी को सड़क पर चलने के लिए झुकते और संघर्ष करते देखा जा सकता है. ऑडियो में एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना जाता है कि शख्स स्मैक का नशा किया हुआ लगता है. स्मैक एक मजबूत ओपिओइड दवा का एक अवैध रूप है, जिसे ब्लैक टार हेरोइन भी कहा जाता है.
इस महीने की शुरुआत में, मकबूलपुरा इलाके में सड़क पर चलने के दौरान डगमगाती एक युवती का वीडियो व्यापक रूप से ऑनलाइन साझा किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया और तीन लोगों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से नशीला पदार्थ बरामद किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़की के परिवार ने उसे छोड़ दिया है और वह अब अमृतसर के एक नशामुक्ति केंद्र में भर्ती है.
यह इलाका नशाखोरी और नशेड़ियों की समस्या के लिए कुख्यात है. सिख पवित्र शहर मकबूलपुरा अक्सर नशीली दवाओं के दुरुपयोग से जुड़ी घटनाओं के लिए सुर्खियों में रहता है. पुलिस द्वारा शुरू किए गए कई नशामुक्ति अभियान अच्छे परिणाम देने में विफल रहे हैं.
इस महीने की शुरुआत में राज्य भर में की गई छापेमारी में कम से कम 350 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया था. राज्य पुलिस के अनुसार, पुलिस ने छापेमारी के दौरान 6.90 किलो हेरोइन, 14.41 किलो अफीम, 5 किलो गांजा, 6.44 क्विंटल पोस्ता भूसी और 2.10 लाख टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन और फार्मा ओपिओइड की शीशियां बरामद की हैं. राज्य भर में संवेदनशील मार्गों पर बेतरतीब ढंग से वाहनों की तलाशी लेने के अलावा नशीली दवाओं से प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान के बाद ₹ 4.81 लाख ड्रग मनी भी जब्त की गई.