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आप बनाम पंजाब राज्यपाल मामले में आज कैबिनेट मीटिंग में बड़ा फैसला लिया गया है. दोबारा विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर प्रस्ताव पास किया गया है. अब मंगलवार को विधानसभा का विशेष सत्र होगा. इससे पहले भी पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने विश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की योजना को बुधवार को विफल कर दिया. मान सरकार आज 'ऑपरेशन लॉटस' को लेकर पीस मार्च करेगी. 92 विधायक आज विधानसभा से लेकर राजभवन तक मार्च करेंगे.
इस पूरे मामले सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा कि राज्यपाल कैबिनेट द्वारा बुलाए सत्र को कैसे मना कर सकते हैं? फिर तो जनतंत्र खत्म है. दो दिन पहले राज्यपाल ने सत्र की इजाज़त दी. जब ऑपरेशन लोटस फ़ेल होता लगा और संख्या पूरी नहीं हुई तो ऊपर से फ़ोन आया कि इजाज़त वापिस ले लो, आज देश में एक तरफ संविधान है और दूसरी तरफ ऑपरेशन लोटस. राज्यपाल के इस कदम की आलोचना करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट किया था कि राज्यपाल द्वारा विधानसभा ना चलने देना देश के लोकतंत्र पर बड़े सवाल पैदा करता है... अब लोकतंत्र को करोड़ों लोगों द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि चलाएंगे या केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया हुआ एक व्यक्ति... एक तरफ भीमराव जी का संविधान और दूसरी तरफ ऑपरेशन लोटस...जनता सब देख रही है...
दरअसल, राज्यपाल ने बृहस्पतिवार को विशेष सत्र आहूत करने के पिछले आदेश को वापस लेते हुए कहा कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजभवन से संपर्क करने के बाद कानूनी राय मांगी गई और सदन के नियमों के अनुसार इसकी अनुमति नहीं है. राजभवन के ताजा आदेश में कहा गया है कि विधानसभा के नियम सिर्फ सरकार के पक्ष में विश्वास मत पारित करने के लिए सत्र बुलाने की अनुमति नहीं देते हैं.राज्यपाल ने मंगलवार को 22 सितंबर के लिए विशेष सत्र आहूत करने की अनुमति दी थी. उनके ताजा आदेश के बाद वह अनुमति वापस ले ली गई थी. आप पार्टी ने हाल ही में दावा किया था कि भाजपा ने उसकी छह महीने पुरानी सरकार को गिराने के लिए अपने ‘‘ऑपरेशन लोटस'' चलाया. ‘‘ऑपरेशन लोटस'' के तहत उसके कम से कम 10 विधायकों से संपर्क करके उन्हें 25-25 करोड़ रुपये की पेशकश थी.
रांची: झारखंड में बुधवार को हेमंत सोरेन सरकार ने दो महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए हैं. एक स्थानीय नीति में 1932 का खतियान का प्रावधान किया गया है और दूसरा आरक्षण नीति में फेरबदल कर ओबीसी का कोटा बढ़ाया गया है. सीएम हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई. कैबिनेट की बैठक में 43 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है. कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने इसकी जानकारी दी.
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के मंडरा रहे खतरे के बीच बुधवार को प्रदेश में ‘स्थानीयता' तय करने के लिए 1932 के खतियान को आधार बनाने का निर्णय लिया है. सरकार ने इसके साथ ही राज्य की सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्गों (OBC) को मौजूदा 14 प्रतिशत के बजाय 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है, साथ ही एसी एवं एसटी वर्ग के आरक्षण में दो-दो प्रतिशत की वृद्धि करने का फैसला किया. सरकार के फैसले पर अमल होने के साथ राज्य में ओबीसी, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का कुल आरक्षण बढ़कर 77 प्रतिशत हो जाएगा.
झारखंड सरकार की मंत्रिमंडल सचिव वंदना डाडेल ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के फैसले लिए गए.
उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने दोनों फैस्लों से संबधित दोनों विधेयकों को विधानसभा से पारित कराने और राज्यपाल की स्वीकृति के बाद केन्द्र सरकार के पास भेजने का भी निर्णय लिया. डाडेल ने बताया कि मंत्रिमंडल ने केन्द्र सरकार से यह अनुरोध करने का निर्णय लिया गया कि वह इन दोनों कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करे जिससे इन्हें देश की किसी अदालत में चुनौती न दी जा सके.
उन्होंने बताया कि स्थानीयता की नीति में संशोधन के लिए लाए जाने वाले नए विधेयक का नाम ‘झारखंड के स्थानीय निवासी की परिभाषा एवं पहचान हेतु झारखंड के स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा एवं परिणामी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं अन्य लाभों को ऐसे स्थानीय व्यक्तियों तक विस्तारित करने के लिए विधेयक 2022' होगा.
वंदना डाडेल ने बताया कि इस विधेयक के माध्यम से राज्य में स्थानीय लोगों को परिभाषित किया जायेगा और आज के मंत्रिमंडलीय फैसले के अनुसार अब राज्य में 1932 के खतियान में जिसका अथवा जिसके पूर्वजों का नाम दर्ज होगा उन्हें ही यहां का स्थानीय निवासी माना जाएगा.
उन्होंने बताया कि जिनके पास अपनी भूमि या संपत्ति नहीं होगी उन्हें 1932 से पहले का राज्य का निवासी होने का प्रमाण अपनी ग्राम सभा से प्राप्त करना होगा.
इसके अलावा राज्य मंत्रिमंडल ने विभिन्न वर्गों के लिए कुल आरक्षण 77 प्रतिशत तक करने का निर्णय लिया.
उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने विधानसभा में ‘झारखंड पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण:अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों एवं पिछड़े वर्गों के लिएः अधिनियम 2001 में संशोधन हेतु विधेयक 2022' पेश करने का फैसला किया, जिसमें अनुसूचित जातियों के लिए राज्य की नौकरियों में आरक्षण 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण प्रतिशत 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की व्यवस्था होगी.
उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडलीय ने इस प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए भी दस प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने का फैसला किया.
पिछले वर्गों में अत्यंत पिछड़ों के लिए 15 प्रतिशत और पिछड़ों के लिए 12 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था किये जाने का निर्णय लिया गया है.
स्थानीयता नीति पर राज्य के आदिवासी संगठनों ने लगातार 1932 खतियान को आधार बनाने की मांग की थी क्योंकि उनके अनुसार राज्य के भूमि रिकॉर्ड का अंग्रेज सरकार ने अंतिम बार 1932 में सर्वेक्षण किया था.
इससे पूर्व झारखंड की रघुवर दास सरकार ने स्थानीयता की नीति तय करते हुए वर्ष 2016 में 1985 को राज्य की स्थानीयता तय करने के लिए विभाजक वर्ष माना था, जिसके खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था.
ऐसा माना जाता है कि राज्य में अपने नाम खनन पट्टा आवंटित करवाने के कारण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार पर खतरा मंडराने की आशंका है, इसलिए उन्होंने राजनीतिक रूप से अहम नीतिगत फैसले लिए हैं.
माना जा रहा है कि चुनाव आयोग ने उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर अपना निर्णय 25 अगस्त को राज्यपाल के पास भेज दिया था, लेकिन राज्यपाल ने अभी तक इस बारे में अपना फैसला नहीं सुनाया है जिससे राज्य सरकार पिछले लगभग तीन सप्ताह से संशय की स्थिति में है. सत्तारूढ़ पक्ष का आरोप है कि इस तरह की संशय की स्थिति पैदा कर राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त की कोशिश की जा रही है, ताकि सरकार को अस्थिर किया जा सके.
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए सोरेन ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने आज अनेक ऐतिहासिक फैसले किये. राज्य ने आज निर्णय ले लिया है कि यहां 1932 का खतियान लागू होगा. राज्य में पिछड़ों को सरकारी नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. इस राज्य में कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा.''
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सरकार की स्थिरता को लेकर विपक्षी माहौल को दूषित कर रहे हैं. सोरने ने दावा किया, ‘‘ मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि मेरी सरकार को कोई खतरा नहीं है.''
सीएम अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में कहा कि दो महीने रह गए हैं, भाजपा जा रही है, आम आदमी पार्टी आ रही है. मैं पिछले कई महीनों से गुजरात में घूम रहा हूं, जनता से मिल रहा हूं, कई टाउन हॉल किए हैं. वकीलों ऑटो ड्राइवर किसानों व्यापारियों सब से मिले सब ने कहा गुजरात में बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार है. आपको किसी भी सरकारी विभाग में काम करवाना है तो पैसे देने पड़ते हैं. नीचे के लेवल पर भी भ्रष्टाचार है, ऊपर भी आरोप लगते रहे हैं. इनके खिलाफ अगर कुछ बोलो तो डराने और धमकाने पहुंच जाते हैं, व्यापारियों उद्योगपतियों को रेड की धमकी देते हैं और कहते हैं तुम्हारा धंधा बंद करवा देंगे. चारों तरफ इतना ज्यादा भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी है. आज हम गारंटी देते हैं. गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी तो भ्रष्टाचार मुक्त और भय मुक्त शासन देंगे.
1. हमारा कोई भी मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक या कोई भी विधायक, हमारा कोई सांसद या किसी किसी और का भी सांसद हो किसी को भ्रष्टाचार नहीं करने देंगे, भ्रष्टाचार किया तो जेल भेजेंगे. गुजरात की जनता का पैसा गुजरात के विकास पर खर्च होगा.
2. AAP की सरकार बनने पर हर किसी व्यक्ति का हर काम सरकार में बिना रिश्वत के किया जाएगा. ऐसी व्यवस्था करेंगे कि आपको काम करवाने के लिए जाना नहीं पड़ेगा, सरकार आपके घर आएगी. दिल्ली में डोरस्टेप डिलीवरी योजना लागू है.
3. नेताओं मंत्रियों विधायकों के सारे काले धंधे बंद किए जाएंगे. जहरीली शराब बिक रही है, इतना नशा कहां से आ रहा है. इनके मां-बाप इन्हीं पार्टियों में बैठे हैं.
4. पेपर लीक बंद होंगे, पिछले पेपर लीक मामले खोले जाएंगे और दोषियों को जेल में डालेंगे.
5. इन लोगों के कार्यकाल में हुए सभी बड़े घोटालों की जांच होगी लूटा हुआ पैसा रिकवर किया जाएगा और उस पैसे से आपके स्कूल अस्पताल बिजली-सड़क-पानी बनाएंगे.
सीएम अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि अगर मैं गुजरात के लोगों को मुफ्त बिजली देने की बात कर रहा हूं तो बीजेपी इसका विरोध क्यों कर रही है? अगर मैं स्कूल अस्पताल ठीक करने की बात कर रहा हूं तो बीजेपी को क्या दिक्कत है, वे क्यों विरोध कर रहे हैं. जैसे दिल्ली के लोगों को मुफ्त बिजली मिली पंजाब के लोगों को मिली बजे गुजरात के लोगों को भी मिलना चाहिए. गुजरात के स्कूल अस्पताल भी ठीक होने चाहिए.
खास बातें
पटना: बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने मणिपुर (Manipur) के जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पांच विधायकों के पार्टी छोड़ने पर बीजेपी (BJP) पर हमला किया. उन्होंने कहा कि, ''एक बात तो साबित हो रही है कि ये किस तरह का काम लोग कर रहे हैं. अन्य पार्टियों से लोगों को अपनी तरफ लाना और खींचना, ये काम जो लोग कर रहे हैं, क्या यह संवैधानिक चीज है? ये कोई सही काम है? इसलिए विपक्ष के सभी लोग एकजुट होंगे तो 2024 के चुनाव में देश की जनता का निर्णय बहुत अच्छा आ जाएगा. तब इन लोगों को पता चलेगा.'' नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि 2024 के चुनावों में भाजपा "50 सीटों पर सिमट सकती है, अगर सभी विपक्षी दल एक साथ आकर चुनाव लड़ते हैं. उन्होंने कहा कि मैं सभी को साथ लाने के लिए काम कर रहा हूं.
नीतीश कुमार ने कहा कि, ''अभी जो हम लोगों ने निर्णय किया कि हम एनडीए (NDA) से अलग होंगे, तो सभी राज्यों में पार्टी के लोगों से बात हो गई थी. मणिपुर के छह के छह एमएलए 10 तारीख के बाद यहां पर आए थे और खुशी प्रकट कर रहे थे. वे हमारे साथ में थे, मिलने आए थे. अब लेकिन यह सोच लीजिए कि हो क्या रहा है? वे (बीजेपी) किसी पार्टी के जीतने वाले लोगों को किस तरह से अपनी तरफ ले रहे हैं.''
नीतीश कुमार ने कहा कि, ''जब हम लोग एलायंस (एनडीए) में साथ थे तब किसी को बनाया, अपने यहां? कभी नहीं... और बाद में सबको अपने पास लेकर जाना है. यह कौन सा स्वभाव है? किस प्रकार का काम है? इस तरह की कोई चीज पहले से चलती रही है? एक नए ढंग से इस तरह का काम किया जा रहा है. उसमें क्या है, सभी (मणिपुर के जेडीयू विधायक) कुछ दिन पहले तो आए थे. परसों खबर की आज के बारे में, कि हम लोग आ रहे हैं. जाने दीजिए जो करता है, उससे क्या फर्क पड़ता है?''