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हैदराबाद: हैदराबाद गैंगरेप केस में शनिवार को दूसरी गिरफ्तारी हुई है. पुलिस ने TRS नेता के नाबालिग बेटे को कस्टडी में लिया है. इसके पहले शुक्रवार को मामले पांच आरोपियों की पहचान हुई थी, जिसमें से एक की गिरफ्तारी हो चुकी है. पांचों आरोपियों में से तीन नाबालिग हैं. फिलहाल अन्य तीन आरोपी अभी हिरासत में नहीं है.
इस मामले में टीआरएस नेता के बेटे की गिरफ्तारी पर राज्य के सीएम केसीआर के बेटे ने ट्वीट किया है. केसीआर के बेटे केटीआर ने अपने ट्वीट में लिखा कि हैदराबाद में नाबालिग से रेप की खबर से आक्रोशित और स्तब्ध, मेरा अनुरोध है कि तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए चाहे, आरोपियों की पार्टी में स्थिति या संबद्धता कुछ भी हों.
इस मामले की जांच कर रही पुलिस का कहना है अब पांच आरोपियों की पहचान कर ली गई है. शहर के पॉश इलाके में एक कार में 17 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किए जाने के कुछ घंटे पहले, संदिग्धों की पब के बाहर निकलते सीसीटीवी फुटेज भी सामने आयी था. जिसमें पीड़िता लड़के के साथ पब से बाहर आती दिख रही है.
बताया जाता है कि लड़कों ने कथित तौर पर जुबली हिल्स इलाके में कार पार्की की और बारी-बारी से उसके साथ गैंगरेप किया, जबकि बाकी कार के बाहर पहरा दे रहे थे. पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्र हैं. इस घटना के बाद पीड़िता के पिता ने पुलिस में इसकी शिकायत की.
पुलिस का कहना है कि लड़की के पिता के बयान पर मामला दर्ज किया था. क्योंकि लड़की कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी. जब लड़की को महिला अधिकारियों के पास भेजा गया, तो खुलासा हुआ कि क्या हुआ था. क्लब ने नाबालिगों को कैसे प्रवेश दिया और क्या उनके पास शराब थी, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है.
हालांकि इस मामले पर पब के प्रबंधक ने सफाई दी है कि पार्टी में किसी को भी शराब पीने या धूम्रपान करने की अनुमति नहीं है. ईशान नाम के एक व्यक्ति ने पार्टी के लिए जगह बुक किया था. पार्टी के बाद वे सभी कार में बैठकर एक साथ चले गए.
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ बीजेपी प्रवक्ता के विवादित और कथित ‘अपमानजनक' टिप्पणियों के विरोध में शुक्रवार को हिंसा भड़क गई थी. विवादित बयान के विरोध में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद दुकानें बंद कराने के दौरान दो समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे पर पथराव और बम फेंके. इस शांत कराने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा. इस हिंसा के सिलसिले में पुलिस ने अब तक कुल 36 लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले में तीन प्राथमिकी दर्ज की है.
दो FIR पुलिस की तरफ़ से जबकि एक FIR घायल व्यक्ति की तरफ़ से लिखी गई है. 40 लोगों को नामज़द किया गया है और 100 से ज़्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ़ FIR दर्ज़ की गई है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्यवाही होगी. कानपुर हिंसा में 13 पुलिसकर्मी और दोनों पक्षों के 30 लोग घायल हुए हैं. वीडियो फ़ुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है.
पुलिस ने बताया कि कानपुर के परेड चौराहे, नई सड़क और यतीमखाना इलाके में हिंसा हुई थी, वहां सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सघन निगरानी बढ़ा दी गई है. इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है, जिसमें 12 कंपनी और एक प्लाटून पीएसी शामिल है. आज 11 बजे तक राष्ट्रपति कोविंद क़ानपुर में ही रहेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर के कमिश्नर से फ़ोन पर बात कर स्थिति का जायज़ा लिया है.
पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा ने कहा, "...36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अब तक तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. वीडियो के आधार पर और लोगों की पहचान की जा रही है." उन्होंने आगे कहा, "साजिशकर्ताओं के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी और उनकी संपत्ति को या तो जब्त कर लिया जाएगा या ध्वस्त कर दिया जाएगा."
कानपुर में शुक्रवार को कथित तौर पर बाजार बंद को लेकर विभिन्न समुदायों के दो समूहों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी. पुलिस ने बताया कि इलाके में हिंसा तब शुरू हुई जब कुछ लोगों ने दुकानों को बंद कराने की कोशिश की जिसका दूसरे समूह ने विरोध किया.
जबरन दुकानें बंद कराने का प्रयास कर रहे लोगों की पुलिस के साथ भी झड़प हुई. पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज करना पड़ा था. मामले में आगे की जांच की जा रही है.
लखनऊ में एडीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि कानपुर के सभी अल्पसंख्यक सदस्यों से अपील है कि शांति व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करें तथा उपद्रवियों को पहचानने में पुलिस की मदद करें. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि हर हाल में शांति व्यवस्था बनाये रखें.
लखनऊ: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 के नतीजे 30 मई को जारी किए. यूपी के एक ऐसे अधिकारी जिसे भ्रष्टाचार मामले का खुलासा करने के बाद सात बार गोली मारी गई थी, ने भी परीक्षा में सफलता हासिल की है. रिंकू सिंह राही ने परीक्षा में 683वां स्थान हासिल किया है. अपने आखिरी प्रयास में सफलता हासिल करके रिंकू की खुशी का ठिकाना नहीं है. रिंकू राही यूपी के हापुड़ में Provincial civil service officer हैं. वर्ष 2008 में उन्होंने मुजफ्फरनगर में 83 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप घोटाले का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई थी. वे राज्य समाज कल्याण विभाग में अधिकारी हैं.
इस मामले में आठ लोगों को आरोपित किया गया और चार को जेल की सजा सुनाई गई थी. घोटाले का खुलासा होने के बाद रिंकू पर हमला किया गया और उन्हें सात गोलियां मारी गई. उनके चेहरे पर की गोली लगी, जिससे उनका चेहरा विकृत हो गया और देखने और सुनने की क्षमता चली गई. रिंकू बताते हैं, "हमले में मेरी एक आंख की रोशनी चली गई." दिलचस्प बात यह है कि एक आईएएस कोचिंग सेंटर के निदेशक के रूप में उन्होंने कई वर्षों तक सिविल सेवा परीक्षा के प्रतिभागियों को पढ़ाया है. उन्होंने कहा, "मेरे स्टूडेंट्स मुझसे यूपीएससी परीक्षा देने के लिए कहते हैं. उनके उत्साहवर्धन के कारण ही मैं यह कर पाया हूं."
रिंकू ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2004 में उन्होंने राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास की थी. पढ़ाई के लिए समय निकाल पाना उनके लिए मुश्किल भरा था लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के बूते वे इसे कर सके. उन्होंने कहा, 'मेरे लिए लोकहित अहम है जब कभी भी स्वार्थ और लोकहित में टकराव होगा तो मैं लोकहित को चुनूंगा. रिंकू का आठ साल का बेटा भी है, वे कहते हैं कि अब उन्हें पता है कि भविष्य के हमलों से खुद को कैसे बचाना है. पहली बार वे चकमा खा गए थे. जब हमलावरों ने उन्हें गोली मारी तो उनके पास घोटाले से जुड़े सारे सबूत थे.
पटना : बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर रास्ता साफ हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में जातिगत जनगणना को मंजूरी दी गई. भाजपा सहित सभी राजनीतिक दलों ने आज सर्वसम्मति से निकट भविष्य में जातिगत जनणना का निर्णय लिया. बता दें कि बीजेपी ने शुरुआत में जातिगत जनगणना को लेकर ऐतराज जताया था. बैठक के बाद सीएम नीतीश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "जाति आधारित जनगणना की जगह गणना की जाएगी और इसे लागू करने के लिए राज्य कैबिनेट में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया जाएगा. "
यह सामान्य जनगणना की ही तरह होगा लेकिन, चूंकि कुछ राज्य जाति आधार पर जनगणना से रोकते हैं, कानूनी परेशानी से बचने के लिए शब्दावली बदल दी गई है. यहां तक कि कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्य, जहां ऐसा किया गया, में इसे सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के तहत शामिल किया गया.