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बीजापुर: जिले के नक्सल प्रभावित इलाका उसूर से नक्सली मुठभेड़ की घटना सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि मुठभेड़ में जवानों ने एक नक्सली को मार गिराया है, वहीं पुलिस ने मौके से एक हथियार भी बरामद किया गया है। बताया जा रहा है कि मुठभेड़ अभी भी जारी है। वारदात की पुष्टि बीजापुर एसपी मोहित गर्ग ने की है।
गौरतलब है कि रविवार को दंतेवाड़ा के चोलनार इलाके में आईईडी की चपेट में आने से मौके पर 5 जवान शहीद हो गए, वहीं धमाके से 2 जवान गंभीर रुप से घायल हो गए थे। घायलों को उपचार कि लिए अस्पताल ले जाया गया था, जहां उपचार के दौरान वे भी शहीद हो गए।
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रायपुर: केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज छत्तीसगढ़ प्रवास के तहत अंबिकापुर पहुंचे। इस दौरान उन्हें बस्तरिया बटालियन के जवानों ने सलामी दी। केंद्रीय गृहमंत्री ने सरगुजा जिले के लुंड्रा के केपी गांव में आयोजित दीक्षांत समारोह में पासिंग आउट परेड का निरीक्षण किया। जवानों को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया। इस दौरान सीएम डॉ. रमन सिंह भी मौजूद रहे। इस अवसर पर गृहमंत्री ने कहा कि जांबाज बस्तरिया बटालियन के जवान नक्सलियों को उनके गढ़ में घुसकर मुंहतोड़ जवाब देंगे। केंद्रीय गृहमंत्री ने विधिवत रूप से इस 241वीं बस्तरिया बटालियन को सीआरपीएफ में शामिल किया। ज्ञात हो कि अधिकारियों समेत बटालियन की कुल संख्या 743 है। नक्सल इलाके में होगी तैनाती
राजनाथ सिंह ने कहा कि सीएम रमन सिंह वहां तक विकास करना चाहते हैं जहां तक कोई सोच भी नहीं सकता। वे हर क्षेत्र में विकास करने को तैयार हैं। उनके नेतृत्व में राज्य तेजी से विकास कर रहा है। घोर नक्सली क्षेत्र समेत प्रदेश के अन्य इलाकों में भी कनेक्टिविटी बढ़ाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। नक्सली विकास विरोधी है, लेकिन हम हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। बस्तरिया बटालियन बस्तर को शांति का टापू बनाएगा। बता दें कि यह बटालियन छत्तीसगढ़ के बस्तर समेत संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में तैनात की जाएगी। इस दौरान राजनाथ सिंह ने सीएम रमन सिंह की जमकर तारीफ की। कहा कि उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तीब्र गति से विकास कर रहा है।
बता दें कि इस बटालियन की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिलों के ही जवानों को शामिल किया गया है। इस बटालियन की खासियत यह है कि इसमें 543 आदिवासी युवा और 189 युवतियां शामिल हैं। उन्हें नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए खास तरह की विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और कोंडागांव जिले से युवाओं की भर्ती की गई है। इन युवाओं को गौरिल्ला वार, हथियार चलाने, मानचित्र अध्ययन, बिना भोजन के भी जंगल में जीवन व्यतीत करना, पुलिस कानून और बिना शस्त्र लड़ाई का प्रशिक्षण दिया गया है।
::/fulltext::पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्य तिथि पर राज्य शासन ने आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था। इस अवसर पर आज मंत्रालय में महानदी भवन के पिरामिड गेट नं. 2 पर अपर मुख्य सचिव श्री सुनील कुमार कुजूर ने मंत्रालय के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को शपथ दिलायी। अधिकारियों-कर्मचारियों ने कहा कि ’’हम भारतवासी अपने देश की अहिंसा एवं सहनशीलता की परम्परा में दृढ़ विश्वास रखते हैं तथा निष्ठापूर्वक शपथ लेते हैं कि हम सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा का डटकर विरोध करेंगे। हम मानव जाति के सभी वर्गो के बीच शान्ति, सामाजिक सद्भाव तथा सूझबूझ कायम करने और मानव जीवन मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली और विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की भी शपथ लेते हैं’’
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रायपुर। राज्य सरकार नक्सल समस्या से निपटने में पूरी तरह से नाकाम है। बस्तर में लगातार हो रहे मुठभेड़, हत्या, ब्लास्ट इस बात का प्रमाण है। राज्य सरकार हर बार नक्सलियों से आरपार की लड़ाई का दावा करती है, लेकिन ऐसा कुछ आज तक नहीं हो पाया है, परिणाम स्वरूप निर्दोष बस्तरवासियों की हत्या के साथ ही सुरक्षा बल के जवानों की शहादत नहीं रूक रही है। कांग्रेस भवन में आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने कहा कि बस्तर में जवानों के लगातार हो रही मौतों पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि राज्य के मुखिया और केन्द्रीय गृहमंत्री कब तक लोगों की आंखों में धूल झोंकते रहेंगे। जवानों की लगातार शहादत के बाद भी राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिसका खामियाजा बस्तर में तैनात जवानों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। श्री बघेल ने जवानों की मौतों पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार नक्सलवाद से निपटने में बुरी तरह से नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा निर्दोषों की हत्या किया जाना कायरना हरकत है।
इधर श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार विकास यात्रा निकालकर जनता के पैसों पर पार्टी का चुनाव प्रचार कर रहे हैं, सीएम को यात्रा छोड़कर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश की जनता ने प्रशासन चलाने, जनता के जानमाल की रक्षा के लिए, कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सरकार चुना है, लेकिन राज्य सरकार के मुखिया को अपना और अपनी पार्टी का प्रचार करने से फुर्सत ही नहीं है कि वे राज्य के गंभीर समस्याओं को देख सकें। बस्तर में लगातार हो रहे नक्सली हमले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें तत्काल यात्रा बंद कर देना चाहिए। पीसीसी चीफ ने कहा कि राज्य सरकार हर बार नक्सल हमले के बाद एक ही बयान दोहराती है कि अब नक्सलियों से आरपार की लड़ाई होगी। चिंतलनार में वर्ष 2010 में 76 जवानों के शहीद होने, 2013 में झीरमघाटी में कांग्रेस के बड़े नेताओं सहित 30 लोगों के जनसंहार, वर्ष 2017 में 25 जवानों की शहादत और मार्च 2018 में नौ जवानों के जान गंवाने की घटना संभवत: याद नहीं है, उन्होंने और भी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि, यदि राज्य सरकार को ये घटनाएं याद होती तो नक्सलियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई कब की शुरू कर दी जाती।