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रायपुर।राजधानी रायपुर की सबसे व्यस्त सड़कों पर रैली, शोभायात्रा आैर जुलूस निकालने के लिए पिछले 455 दिनों में 462 से अधिक आवेदन आए थे। इनमें राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक आैर अन्य प्रकार के आवेदन शामिल थे। लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित होने के कारण इनको निरस्त कर दिया गया। इसी प्रतिबंध के चलते राहुल गांधी के रोड शो को भी शहर के बीच से निकलने की अनुमति जिला आैर पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं दी जा रही है।
- शहर के भीतर से रोड शो निकालने को लेकर कांग्रेस आैर जिला प्रशासन आमने-सामने है। कांग्रेस नेता जहां अपना कार्यक्रम यथावत रखने की बात कह रहे हैं तो वहीं पुलिस-प्रशासन भी इस प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी शर्त में अनुमति नहीं देने की बात कह रहे हैं।
- रोड शो की अनुमति को लेकर मचे बवाल के बाद भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो पाया कि रायपुर कलेक्टर की आेर से फरवरी 2017 में एक आदेश जारी किया गया था जिसमें कहा गया है कि राजधानी की सड़कों का लगातार विकास होने के साथ-साथ बढ़ती ट्रैफिक के कारण सड़कों पर यातायात का दबाव काफी अधिक बढ़ गया है। चूंकि यह एक बड़ा व्यावसायिक केन्द्र भी है।
- पुराना शहर होने के कारण ऑफ रोड पार्किंग की उपलब्धता भी काफी कम है। ऐसी स्थिति में इन मार्गों पर आयोजित होने वाली रैली , जुलूस से यहां की ट्रैफिक को दूसरी सड़कों पर डायवर्ट करने पर पूरी व्यवस्था बाधित हो जाती है। इससे इन सड़कों से होकर गुजरने वालों को काफी तकलीफ उठानी पड़ती है।
- इस गंभीर समस्या के निराकरण के लिए शहर के अतिव्यस्त मार्गों में सभी प्रकार की रैली, जुलूस व शोभायात्रा को सुबह नौ बजे से रात 9 बजे तक प्रतिबंधित किया गया है।
इन सड़कों पर लगाया गया प्रतिबंध
- आमापारा तिराहे से शास्त्री चौक तक आजाद चौक से सद्दानी चौक-सत्तीबाजार-सदरबाजार, कोतवाली चौक तक कोतवाली चौक से जयस्तंभ चौक तक शारदा चौक से गुरुनानक चौक तक
धार्मिक शोभायात्रा के आवेदन सबसे ज्यादा
- पड़ताल में पाया कि इस मार्ग से रैली या शोभायात्रा निकालने सबसे ज्यादा धार्मिक संगठनों से आवेदन आए थे। लगभग 277 से ज्यादा आवेदन धार्मिक शोभायात्रा निकालने के आए थे। लेकिन सभी को बैरंग वापस कर दिया गया। बताया गया है कि शिवसेना के पदाधिकारी इस आदेश के विरोध में हाईकोर्ट भी गए थे लेकिन वहां से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था।
- इसी तरह सामाजिक संगठनों द्वारा लगभग 81 आवेदन दिए गए थे। जबकि राजनैतिक संगठनों द्वारा इस दौरान लगभग 25 आवेदन लगाए गए थे। इस तरह कुल 462 आवेदन लगाए गए थे। लेकिन सभी को रूट बदलकर अपना कार्यक्रम करने की बात कही गई।
नहीं दे सकते अनुमति
- कांग्रेस नेता जिस रूट से राहुल गांधी का रोड शो आयोजित करना चाह रहे हैं वह लगभग सवा साल पहले से प्रतिबंधित है। इसलिए इस रूट पर किसी भी प्रकार के आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती। कलेक्टर की आेर से जारी आदेश में प्रतिबंधित सड़कों का उल्लेख है। वे चाहें तो वैकल्पिक मार्ग पर अपना रोड शो कर सकते हैं। विजय अग्रवाल, एसपी सिटी रायपुर
वैकल्पिक मार्ग से रोड शो निकालने कहा
- कांग्रेस नेताआें ने राहुल गांधी के मेगा रोड शो के लिए एडीएम काे सूचना देकर आवश्यक सुरक्षा आैर यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्टर के पास आवेदन लगाया था। उनके आवेदन के जबाव में एडीएम द्वारा कांग्रेस नेताआें को पत्र जारी कर बताया गया है कि यह प्रतिबंधित मार्ग है। इसलिए इस रूट पर मेगा रोड शो की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- साथ ही इसके लिए उन्होंने पुलिस विभाग को पत्र भेजकर वैकल्पिक मार्ग के लिए अभिमत भी मांगा है। यह भी कहा गया है कि पूर्व निर्धारित रूट के स्थान पर वैकल्पिक मार्ग से रोड शो निकाल सकते हैं।
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कोंडागांव।मुख्यमंत्री रमन सिंह की विकास यात्रा रविवार को कोंडागांव पहुंचेगी। यहां पर सीएम की रैली है, लेकिन इससे एक दिन पहले ही मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं होने से यहां एक व्यक्ति अपने बीमार बेटे को डोला में लेकर 25 किमी पैदल चलना पड़ता है।
- ग्राम मर्दापाल और इससे लगे 60 पहुंचविहीन गांवों में अब तक मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। मरीजों को बीमारियों से निजात दिलाने के लिए परिजन उन्हें डोला से 25 किमी पैदल चलकर स्वास्थ्य केंद्र मर्दापाल तक पहुंचा रहे हैं।
- एेसा ही एक मामला मंगलवार को मर्दापाल से 10 किमी दूर मटवाल कुधूर मार्ग पर देखने को मिला। यहां ग्राम बेड़मा के ग्रामीण सुंदर और लखमू अपने बीमार बेटे को डोले में बिठाकर मर्दापाल अस्पताल ले जा रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें यदि मोबाइल नेटवर्क की सुविधा मिलती तो वे भी आसानी ने 102, 108 जैसी एंबुलेंस सुविधाओं का लाभ उठाते और जल्दी नजदीकी अस्पताल में पहुंचाते।
सीएम ने की थी घोषणा
- मर्दापाल और इससे लगे अन्य गांवों के ग्रामीणों को दूर संचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 3 माह पहले सीएम डॉ. रमन सिंह ने ग्राम धनौरा में सभा के दौरान मर्दापाल में मोबाइल टावर लगाने की बात कही थी, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने कहा कि विकास यात्रा के दौरान वे गांव में आने वाले जनप्रतिनिधियों से मोबाइल नेटवर्क की सुविधा जल्द दिलाने की मांग करेंगे।
एंबुलेंस भी नहीं चलती मर्दापाल इलाके में
- मर्दापाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने महतारी और संजीवनी सेवा की गाड़ियाें की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद इलाके में ये दोनों गाड़ियां नहीं चल रही हैं। स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. केशव साहू ने कहा मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने से ग्रामीण आपातकालीन सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। वे सालों से मरीजाें को डोंगियों और कांवड़ के सहारे हाॅस्पिटल में लाकर इलाज करवा रहे हैं।
टॉवर लगाने के आदेश नहीं
- इधर बीएसएनएल के एसडीओ देवेंद्र कुमार ढोक ने कहा कि मर्दापाल और इससे लगे गांवों में टॉवर लगाने के लिए कोई आदेश कंपनी से नहीं मिला है। इसके चलते इस क्षेत्र में लोगों को नेटवर्क की सुविधा नहीं मिल रही है।
सुकमा।मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह सरकार की विकास यात्रा दूसरे दिन सुकमा जिले में पहुंच चुकी है। सुकमा के गारीदास में हुई सभा में सीएम रमन सिंह ने 90 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। साथ ही स्थानीय लोगों की मांग पर गारीदास के जिस स्कूल में सभा हो रही थी, उसके मैदान में 50 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम बनाने की घोषणा की।
- कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की जयकार और वंदेमातरम के नारों के साथ हुई। इससे पहले विकास और सरकार की योजनाओं काे लेकर शॉर्ट फिल्म दिखाई गई। सीएम रमन सिंह ने घोषणा की है कि सुकमा जिले में बिजली कटौती पूरी तरह से बंद होगी।
- उन्हाेंने कहा कि कोई मुख्यमंत्री हवाई यात्रा करे, यह ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री का लोगों से जुड़ना और लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए सुकमा से कोंडा तक सड़क का निर्माण कराया जाएगा। सभी गरीबों के घरों में निशुल्क बिजली पहुंचेगी।
- सीएम ने कहा कि भाजपा की सरकार लोगों को अंधेरे से मुक्ति दिलाने का काम करती है। जहां बिजली के खंभे नहीं है, वहां सोलर पंप लगाए जाएंगे। बच्चे बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें। उनको दिक्कत न हो अंधेरे के कारण उनका भविष्य नहीं बिगड़ना चाहिए।
- उन्होंने कहा कि किसानों को खुशी मिले, उनके जीवन में उन्नति आए, यही वो चाहते हैं। उन्होंने किसानों से कहा कि बोरिंग कराइये, पंप चलाइये। सुकमा जिले में किसी को बिजली का बिल नहीं देना पड़ता है। यहां के लोगों को शिक्षा निशुल्क, भोजन निशुल्क, चावल निशुल्क दिया जा रहा हैं।
30 हजार लोगों को मिलेगा आवास का लाभ
- मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि सुकमा जिले में 13 हजार लोग आवास के लिए चिह्नित किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में शामिल कर 30 हजार लोगों को 1.5 लाख की लागत से बनने वाले आवास का लाभ मिलेगा।
- जिनके पास दस्तावेज नहीं थे। हमारे आदिवासी भाई जिनके पास कागजात नहीं थे, उनके दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। प्रमाणीकरण का काम किया गया। 72 हजार लोगों को राशन कार्ड देनेे का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि रमन सिंह आपसे कुछ मांगने आया है। वो आपका घर, जमीन नहीं चाहता, वो तो बस आपका आशीर्वाद चाहता है।
सुकमा को जिला बनाने की घोषणा पर हुआ आश्चर्य
-सीएम ने कहा कि जब उन्होंने 15 अगस्त 2012 को सुकमा जिला बनाने की घोषणा की थी, लोगों को नहीं, यहां के कार्यकर्ताओं का आश्चर्य हुआ। उन्होंने फोन कर पूछा कि सच में आप सुकमा को जिला बना देंगे। आज सुकमा को देखिए। ऐसा विकास अन्य जिलों में नहीं दिखता है।
- उन्होंने कहा कि सुकमा को छत्तीसगढ़ के सबसे बेहतर जिलों में ले जाएंगे। सुकमा में 32 कार्यालय काम कर रहे हैं। जिला कलेक्ट्रेट को देखने के लिए रायपुर से अधिकारी आते हैं। अब अधिकारी कहते हैं कि उनके जिलों का भी सुकमा जैसा विकास चाहिए।
गारीदास के लोगों से आशीर्वाद लेने आया हूं
- सीएम रमन सिंह ने कहा कि यह पुण्य भूमि है, धन्य भूमि है, माता का आशीर्वाद है यहां पर। उन्होंने कहा कि यहां के आदिवासी भाई इतने निश्चल हैं कि मंदिर जाने के साथ इनका भी पैर छू लो तो शिव जी का आशीर्वाद मिल जाता है।
- उन्होंने कहा कि 2003 में जब वो यहां आए थे तो गारीदास के लोगों ने उन्हें आशीर्वाद दिया था। गादीरास के लोगों ने ताकत और हिम्मत दी कि रमन सिंह 15 सालों से प्रदेश की सेवा कर रहा है। रमन सिंह आपसे आज कुछ मांगने आया है। मैं तो मुख्यमंत्री के नाते 2018 के लिए आशीर्वाद लेने के लिए आया हूं।
कांग्रेस पर साधा निशाना
-सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के लोगों ने 60 सालों में विकास नहीं किया। कांग्रेस के शासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने अपने शासनकाल में उनसे 50-60 सालों में गरीबी हटाओ-गरीबी हटाओ का नारा सुना। उन्होंने इसी नारे को हटाकर राज किया।
- उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या कांग्रेस ने एक रुपये किलो चावल दिया था, आप बताइये। कांग्रेस ने बस राज किया। कांग्रेस ने क्या 2003 तक इलाज के लिए कोई योजना शुरू की थी। गरीबों के लिए अस्पताल के लिए बीमारों के लिए कोई बीमा योजना शुरू की थी। आज हर गरीब के पास 50 हजार का स्वास्थ्य बीमा है।
- सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा दिया है कि डॉ. रमन यहां के आदिवासियों भाइयों को बता दो कि बड़े से बड़ा ऑपरेशन कराना है, उपचार कराना है तो गरीबों को आयुष्मान योजना में पांच लाख रुपये दिया जाएगा।
- गरीबों को अभी तक 50 हजार गैस चूल्हा और सिलेंडर मिला है। उज्जवला योजना में जिनका नाम छूट गया था उन सभी को शत प्रतिशत लाभ मिलेगा।
इन योजनाओं की घोषण
- 15 करोड़ की लागत से 33केवी उपस्थान
- 32 किमी तक सड़कों का निर्माण
- एक करोड़ की लागत से गौरव पथ का निर्माण
- नदी पर वन विभाग द्वारा पुल का निर्माण होगा
360 किमी की सफर तय करेगी विकास यात्रा
- रमन सिंह सरकार की विकास यात्रा का दूसरे दिन बस्तर और सुकमा के जिलों में होगी। दूसरे दिन विकास यात्रा 360 किमी का सफर तय करेगी। इससे पहले मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि विकास यात्रा सिर्फ विकास के बारे में बताने के लिए नहीं, बल्कि विकास को और बढ़ाने के लिए हो रही है।
- ये यात्रा जनता का आशीर्वाद लेने के लिए निकाली जा रही है। इस दौरान 12 हजार किसानों को 17 लाख रुपये के बोनस का वितरण किया जाएगा।
सुकमा और बस्तर के चार जिलों का दौरा
- मुख्यमंत्री की विकास यात्रा रविवार को बस्तर और सुकमा के चार जिलों में होगी। इस दौरान दो स्वागत सभा और तीन आमसभा होगी। जगदलपुर से सीएम हेलीकॉप्टर से 149 किमी दूर कोंटा विधानसभा में पहुंचकर गादीरास में 11:30 से 1:00 बजे तक आम सभा करेंगे। इसके बाद लंच करके सीएम हेलीकॉप्टर से 151 किमी दूर नारायणपुर विधानसभा में जाएंगे जहां 2:00 से 2:30 बजे तक स्वागत सभा होगी। यहां से रथ से 20 किमी दूर नारायपुर विधान सभा के भानपुरी में 3:00 से 3:30 बजे तक स्वागत सभा होगी। यहां से रथ से 17 किमी दूर कोंडागांव विधानसभा पहुंचेंगे जहां दहीकोंगा में 4:00 से 4:20 बजे तक स्वागत कार्यक्रम होगा। यहां से 25 किमी दूर रथ से बनियागांव पहुंचकर 4:40 से 5:10 तक स्वागत सभा होगी। यहां से 11 किमी दूर रथ से कोंडागांव में पहुंचेंगे जहां रोड शो, आम सभा और रात्रि विश्राम होगा।
::/fulltext::रायपुर.छत्तीसगढ़ से शुरू होने वाली तथा रायपुर से गुजरनेवाली दर्जनभर बड़ी ट्रेनों में रायपुर मंडल ने जनवरी मध्य से अब तक भीड़ को ध्यान में रखते हुए करीब चार माह में 43 एक्सट्रा बोगियां जोड़ी हैं। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक इनमें 32 स्लीपर और 11 एसी बोगियां हैं। इन श्रेणियों में वेटिंग क्लीयर करने के लिए कोच जोड़े गए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा बुरा हाल इन ट्रेनों की जनरल बोगियों का है।
72 लोगों की क्षमता वाली इन बोगियों में तीन-तीन सौ लोग सामान के साथ सफर कर रहे हैं। पांव रखने की जगह नहीं है, जनरल कोच का वातावरण दम घोंटने वाला हो गया है। लेकिन रेलवे ने किसी भी ट्रेन में एक भी एक्सट्रा जनरल बोगी नहीं जोड़ी है, ताकि इस क्लास के यात्रियों को कम से कम खड़े रहकर सफर करने की जगह मिल सके।
सवाल के जवाब में रेल अफसर चुप
देश का रेलवे बोर्ड ट्रेनों में एसी कोच बढ़ाने की तैयारी में है। रेल अफसरों का ही मानना है कि 22 बोगियों वाली किसी भी ट्रेन में अगर तीन सा साढ़े तीन (पार्सल वैन समेत) जनरल बोगियां हैं तो इनमें इतने यात्री चल रहे हैं, जितने ट्रेन की बाकी 18 एसी-स्लीपर बोगियों में सब मिलाकर नहीं रहते। इसके बावयूद रायपुर रेल मंडल ने यहां की किसी ट्रेन में जनरल बोगी नहीं बढ़ाई है जबकि मंडल में ऐसी बोगियां उपलब्ध हैं। ऐसा क्यों, इस सवाल के जवाब में रेल अफसर चुप हैं, लेकिन जानकारों के मुताबिक एक्स्ट्रा कोच के मामले में रेलवे का फोकस कमाई पर ज्यादा है।
जनरल से बहुत कम आय कमाई का यह समीकरण
रेलवे बोर्ड के ही आंकड़े बताते हैं कि देशभर में 1 अप्रैल 2016 से 10 मार्च 2017 के बीच लंबी दूरी की ट्रेनों में थर्ड एसी कोचों में 17 फीसदी यात्रियों ने सफर किया। इनसे होने वाली आय रेलवे की कुल आमदनी (किराया) का 32. 60 फीसदी है। इसी अवधि में स्लीपर से 59.78 फीसदी लोगों ने सफर किया। स्लीपर से रेलवे की आय 44.78 फीसदी है। इसकी तुलना में रेलवे को जनरल बोगियों से 8 फीसदी से भी कम आमदनी हुई है। जानकारों का दावा है कि जनरल में एक्सट्रा कोच नहीं जोड़ने का यह बड़ा कारण है कि कमाई कम है।
सिर्फ 8 ट्रेनों में जोड़े गए कोच
रायपुर मंडल की जिन 8 ट्रेनों में रेलवे ने एक्सट्रा कोच लगाए हैं, उनके जनरल में ठसाठस भीड़ है। लोग फर्श, गेट व बाथरूम के पास बैठकर सफर कर रहे हैं, लेकिन कोच या तो एसी वाले लगे हैं या स्लीपर। जैसे, सारनाथ एवं दुर्ग-राजेंद्रनगर साउथ बिहार एक्सप्रेस में एक-एक स्लीपर कोच जोड़ा गया है। दुर्ग-अंबिकापुर एक्सप्रेस में 30 जून तक के लिए एक स्लीपर कोच लगाया गया है। बिलासपुर-रींवा इंटरसिटी में 1 जुलाई तक स्लीपर का एक एक्स्ट्रा डिब्बा रहेगा। बिलासपुर-पटना एक्सप्रेस में एक एसी-3 सह 2 कोच लगाया गया है। पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस में भी एसी-3 का एक्सट्रा कोच लगा है। विशाखापटनम-कोरबा लिंक एक्सप्रेस और हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस में भी एक-एक एसी थ्री कोच एक्सट्रा लगाया गया है।
जोन ने सालभर में तीन हजार एक्सट्रा कोच लगाए, इनमें जनरल केवल 10
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन (एसईसीआर) में रायपुर, बिलासपुर और नागपुर मंडल आते हैं। जोन ने पीक सीजन यानी इस साल मार्च में 98 और अप्रैल में 111 एक्सट्रा कोच जोड़े हैं, अर्थात दो माह में 209 एसी व स्लीपर कोच लगाए। जोन ने भी किसी भी ट्रेन में एक्सट्रा जनरल कोच नहीं जोड़ा। सालभर में तो हाल और बुरा है। अप्रैल-2017 से अप्रैल-2018 तक जिन में 3 हजार 62 अतिरिक्त कोच विभिन्न ट्रेनों में लगाए गए। जो आंकड़े मिले हैं, उनके अनुसार इनमें जनरल कोच की संख्या 10 ही है।