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मजान के मुबारक महीने की शुरुआत हो गई है और इसको देखते हुए गृह मंत्रालय ने कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला किया है. गृह मंत्रालय रमजान के महीने में शांति कायम रखने के लिए जम्मू-कश्मीर में सैन्य ऑपरेशन पर रोक लगा दी है. गृह मंत्रालय ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों को आदेश दिया है कि रमजान के पवित्र महीने में सुरक्षा बल कोई सैन्य ऑपरेशन न करे. यह फैसला केंद्र सरकार ने शांति व्यवस्था में यकीन रखने वाले मुसलमानों को देखते हुए लिया है. इस फैसले से उन्हें रमजान के दौरान कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वह शांतिपूर्ण तरीके से रह सकेंगे. गृह मंत्रालय ने ट्वीट कर यह भी कहा है कि इस्लाम से आतंक और हिंसा को अलग करना जरूरी है. गृह मंत्रालय ने कहा है कि जब तक मासूम जनता पर कोई आतंकी हमला ना हो तब तक फायरिंग ना करें. मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह फैसला मुस्लिम भाई, बहनों की हिफाजत के लिए लिया गया है, ताकि वे रमजान के दौरान अमन-चैन से रह सके.
गृहमंत्रालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीएम मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह को धन्यवाद दिया. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'मैं इस फैसले का स्वागत करती हूं और पीएम मोदी और राजनाथ सिंह को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने के लिए धन्यवाद देती हूं. सभी पार्टियों को इस मामले को लेकर सर्वसम्मति बनाने के लिए धन्यवाद देती हूं.'गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से अपील कर रमजान और अमरनाथ यात्रा को देखते हुए सैन्य ऑपरेशन ना चलाने और शांतिपूर्ण हालात बनाने की अपील की थी. यह फैसला सर्वदलीय बैठक के बाद सर्वसम्मति से लिया गया था.
::/fulltext::नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कठुआ सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के तीन गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने तथा मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने से बुधवार को इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि कठुआ बलात्कार एवं हत्या मामले की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ही करेगी।
इस घटना के मुख्य आरोपियों में से एक विशाल जंगोत्रा की तरफ से गवाही देने वाले उसके तीन दोस्तों- साहिल, सचिन और नीरज शर्मा ने पुलिस की प्रताड़ना से खुद को बचाने, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए जाने तथा मामले की सीबीआई से जांच कराए जाने का न्यायालय से अनुरोध किया था। तीनों जम्मू के रहने वाले हैं और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के कृषि कॉलेज में विशाल जंगोत्रा के साथ पढ़ाई करते हैं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें राज्य पुलिस अधिकारियों ने 19 से 31 मार्च के बीच शारीरिक और मानसिक यातना दी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा, विशाल जंगोत्रा सात जनवरी से 10 फरवरी तक मुजफ्फरनगर में तीनों गवाहों के साथ था और छात्रों को इससे अलग बयान देने पर मजबूर किया जा रहा है। उस दौरान विशाल तीनों गवाहों के साथ परीक्षा और प्रेक्टिकल में शामिल हुआ।
वकील ने आरोप लगाया कि अपराध शाखा से छात्रों की जान को खतरा है, इसलिए उन्हें सुरक्षा प्रदान कराई जानी चाहिए। उन्होंने मामले की जांच सीबीआई से कराने की भी मांग की थी। न्यायालय ने दोनों मांगें खारिज कर दीं।
नई दिल्ली: देश के केंद्रीय बैंक आरबीआई द्वारा 200 रुपये और 2000 रुपये के नए नोट जारी किए हुए करीब डेढ़ साल हो चुके हैं. यानी इतना समय बीत चुका है कि अब ये नोट पुराने होने लगे और इनका रंग खराब होने लगे. नोट के कटने-फटने की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं. कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि आरबीआई और सरकार की ओर से इस दिशा में अभी कोई ऐसा कदम नहीं उठाया गया है जिससे लोगों की समस्या का समाधान हो सके.
रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां पर सरकारी हीला-हवाली, काम के प्रति उनका रवैया आश्चर्यजनक रूप से सवालों के घेरे में खड़ा होता है. सरकार के काम जहां नियमावली के हिसाब से किए जाते हैं ऐसे में अभी तक ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है या फिर कहें कि पुराने नियमों में ऐसा कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया है जिससे लोगों की दिक्कतों को समय रहते ठीक किया जा सके. रिपोर्ट में यह सवाल उठा रहे हैं कि जब यह समस्या गंभीर हो जाएगी तब तक सरकार और आरबीआई हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्तमान स्थिति में अगर किसी वजह से 200 और 2000 रुपये के नोट यदि गंदे हो जाएं तो इन्हें न तो बैंकों में जमा किया जा सकता है और न ही इन्हें बैंकों में बदला जा सकेगा. इसकी वजह यह है कि मौजूदा करेंसी नोटों के बदलने से जुड़े नियमों के दायरे में इन नए नोटों को लाया ही नहीं गया है. यानी केवल नियमावली में इतना सा बदलाव करना है, लेकिन यह भी अभी तक नहीं किया गया है.
दावा किया जा रहा है कि कटे-फटे या गंदे नोटों को बदलने का मामला आरबीआई (नोट रिफंड) नियम के तहत आता है, जो आरबीआई ऐक्ट की धारा 28 का हिस्सा है. इस ऐक्ट में 5, 10, 50, 100, 500, 1,000, 5,000 और 10,000 रुपये के करेंसी नोटों का जिक्र है, लेकिन 200 और 2,000 रुपये के नोटों को इसमें जगह नहीं दी गई है. मीडिया में इस प्रकार की खबरें आई हैं लेकिन आरबीआई की नोट बदलने को लेकर दी गई नियमावली में यह साफ लिखा गया है कि भविष्य में जारी होने वाले नोटों पर भी बदलने के नियम लागू होते हैं.
ज्ञात हो कि 2,000 रुपये का नोट 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के ऐलान के बाद जारी किया गया था जबकि 200 रुपये का नोट अगस्त 2017 में जारी किया गया था. अभी 2,000 रुपये के करीब 6.70 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट सर्कुलेशन में हैं और आरबीआई ने अब 2,000 रुपये के नोट छापना बंद कर दिया है.
नई दिल्ली: देश में मंगलवार को एक बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए. कर्नाटक चुनाव के नतीजे आने से पहले ही ये दाम बढ़ाए गए. दिल्ली में पेट्रोल 75 रुपए के पास पहुंच गया है. सोमवार के बाद मंगलवार को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल पर 15 पैसे की बढ़ोतरी की है. इससे पेट्रोल 5 साल के उच्चतम स्तर 74.95 पैसे पर पहुंच गया है. वहीं, दिल्ली में डीजल का भाव 66.36 पर पहुंच गया है. डीजल का यह अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. बता दें कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) द्वारा सोमवार को परिवहन ईंधन के लिए परिवर्तनीय मूल्य निर्धारण प्रणाली की बहाली के साथ राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमतें 74.80 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं थीं. आईओसी ने 19 दिनों के लिए परिवर्तनीय मूल्य निर्धारण प्रणाली पर रोक लगा दी थी, ताकि ग्राहकों के बीच अनावश्यक तनाव न फैले.
दिल्ली में सोमवार को पेट्रोल की कीमत सितंबर 2013 के बाद से अबतक के सबसे उच्च स्तर 74.80 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई थीं. 2013 में पेट्रोल की कीमत 76.06 रुपये प्रति लीटर थी. कीमतों में अंतिम वृद्धि 24 अप्रैल को हुई थी, उस दौरान पेट्रोल 74.63 रुपये प्रति लीटर थी. कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे अन्य मेट्रो शहरों में सोमवार को पेट्रोल की कीमतें कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गईं. इन शहरों में क्रमश 77.50 रुपये, 82.65 रुपये और 77.61 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई हैं. पेट्रोल की कीमतों से इतर, डीजल के दामों में भी 24 अप्रैल के बाद वृद्धि दर्ज की गई. दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में डीजल की कीमतें क्रमश 66.14 रुपये, 68.68 रुपये, 70.43 रुपये और 69.79 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई थीं.
अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद कीमतों में पिछले 19 दिनों से कोई बदलाव नहीं हुआ था, जिसे समीक्षकों ने कर्नाटक चुनाव से पहले एक राजनीतिक कदम करार दिया है. आईओसी के अध्यक्ष ने आठ मई को हालांकि कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय दरों में वृद्धि के बावजूद परिवर्तनीय मूल्यों पर अस्थाई तौर से रोक लगा दी गई थी, ताकि ग्राहकों के बीच डर न रहे. उपभोक्ताओं के लिए यह अस्थाई राहत सोमवार को मूल्य वृद्धि के साथ समाप्त हो गई.
नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सीसीटीवी लगाने के टेंडर को रोकने के मामले को लेकर उप-राज्यपाल अनिल बैजल के आवास के बाहर धरने पर बैठे हैं. अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी कैबिनेट के मंत्री और विधायक भी हैं. सीएम अरविंद केजरीवाल ने उप-राज्यपाल पर भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है. हालांकि सीएम के धरने पर बैठने के बाद एलजी ने दिल्ली सरकार की कैबिनेट को मिलने की अनुमति दी. लेकिन सीएम केजरीवाल ने यह कहते हुए मिलने से मना कर दिया कि सभी विधायक आम जनता के प्रतिनिधि हैं, लिहाजा सभी को मिलने के लिए बुलाया जाना चाहिए.
गौरतलब है कि दिल्ली में सीसीटीवी लगाने के टेंडर को रोकने के मामले को लेकर अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्रियों और विधायक के साथ मिलकर अनिल बैजल से मिलने के लिए मार्च निकालने की घोषणा की थी. उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उप राज्यपाल (एलजी) को पत्र लिखकर उनसे मिलने के लिए समय भी मांगा था. सिसोदिया ने कहा कि चुनाव से पहले लोग कहते थे कि सीसीटीवी ज़रूरी है.
हमने कहा जहां महिलाएं चाहेंगी, जहां रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) चाहेंगे, वहां लगाएंगे. उन्होंने कहा कि तीन साल एलजी कुछ नहीं बोले, लेकिन जब टेंडर हो गया अलॉटमेंट हो गया तो एलजी साहब कमेटी वाला मसला ले आए. हमसे बहुत से रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन मिलने आए.सिसोदिया ने कहा कि सोमवार को तीन बजे हम सारे विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री एलजी से मिलेंगे. हम एलजी से पूछेंगे कि महिलाओं की सुरक्षा होगी तो क्या समस्या है? हमने एलजी साहब से समय मांगा है.
एलजी साहब सोच रहे हैं कि दिल्ली सरकार का एक प्रोजेक्ट कैसे पूरा हो रहा है. हमने समय मांगा है, अभी उन्होंने समय नहीं दिया है. जब समय देंगे तब जाएंगे.
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