Saturday, 30 August 2025

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वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल : 'वेदांता और भारत को बदनाम करना चाहते हैं लोग'.....  

 

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तूतीकोरिन में पुलिस फ़ायरिंग और पिटाई में मारे गए 13 लोगों की मौत पर जारी हंगामे पर वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल का कहना है कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग उनकी कंपनी वेदांता और भारत को बदनाम करना चाहते हैं.

स्टरलाइट पर क्या है आरोप?

तूतीकोरिन में वेदांता ग्रुप की कंपनी स्टरलाइट कॉपर के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों पर पुलिस फ़ायरिंग और लाठीचार्ज में अब तक 13 लोग मारे जा चुके हैं. ये विरोध लंबे समय से जारी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्टरलाइट कॉपर प्लांट से निकलने वाला खतरनाक औद्योगिक कचरा ज़मीन, हवा और पानी में प्रदूषण फैलाने के अलावा उनके स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा रहा है जिससे लोगों की मौत भी हुई है, और वो चाहते हैं इसे बंद किया जाए. कंपनी इन आरोपों से इनकार करती है. तूतीकोरिन में अभी भी पुलिस भारी संख्या में मौजूद है और इंटरनेट कटा हुआ है. राज्य सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी ने भी गुरुवार को कहा था कि कुछ राजनीतिक नेता और असामाजिक तत्व प्रदर्शनों में घुस गए हैं और इसे ग़लत रास्ते पर ले गए हैं. इस वक्तव्य की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हुई थी. अनिल अग्रवाल ने गुरुवार को ट्विटर पर जारी एक वीडियो संदेश में तूतीकोरिन की घटनाओं को "दुर्भाग्यपूर्ण" और दुख देने वाला बताया था. अपने वीडियो संदेश में अनिल अग्रवाल ने कहा था कि वो ये बिज़नेस लोगों की मर्ज़ी से आगे बढ़ाना चाहेंगे और ये उनकी समृद्धि के लिए है.

पहले भी विवादों में रही है वेदांता

पर्यावरण के मुद्दे पर सवाल के जवाब में वेदांता का कहना है,"कंपनी स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े कड़े मानकों का पालन करती है और पिछले सालों में कंपनी ने प्रशासन और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सभी नियमों का पालन किया है." स्थानीय लोग और कार्यकर्ता कंपनी के इन दावों को ग़लत बताते हैं. क्या घटना में मारे गए लोगों की मदद के लिए उनकी मदद की योजना है, इस पर अनिल अग्रवाल की ओर से सीधा जवाब नहीं मिला और कहा गया कि, "इस संकट के मौके पर तूतिकोरिन के लोगों को जो भी मदद चाहिए होगी हम उनकी मदद करेंगे." कंपनी ने सरकार और प्रशासन से आसपास के इलाकों में रहने वाले समुदायों और हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा की अपील की है." तमिलनाडु के तूतीकोरिन से पहले उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में भी अपने निवेश को लेकर वेदांता विवादों में रही है. ऐसा क्यों है, इस पर पूछे गए सवाल का बिहार के पटना में पैदा हुए अनिल अग्रवाल ने कोई जवाब नहीं दिया.

चार लाख टन तांबे का उत्पादन करती है स्टरलाइट

जिस तरह तूतीकोरिन में पुलिस की ओर से लोगों पर गोलियां चलाई गईं और उन्हें पीटा गया, इस पर ऐसे आरोप भी लगे कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर वेदांता का प्रभाव है जिसके कारण प्रशासन और पुलिस की ओर से ऐसी कार्रवाई हुई. अनिल अग्रवाल ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा, "देश के कई कोनों में और दुनिया के कई देशों में हमारे ऑपरेशंस चल रहे हैं. हम अपना बिज़नेस न्यायोचित तरीके से चलाने में विश्वास रखते हैं, न कि प्रशासन पर कोई प्रभाव डालकर." वेदांता दुनिया की सबसे बड़ी खनन कंपनियों में से एक है. अनिल अग्रवाल ने मुंबई में वेदांता नाम की कंपनी बनाई थी जिसे उन्होंने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड कराया. स्टरलाइट वेदांता समूह की ही कंपनी है. तूतीकोरिन वाले कारखाने में हर साल चार लाख टन तांबे का उत्पादन होता है. कंपनी इसकी क्षमता दोगुना करना चाहती है. तमिलनाडु प्रदूषण कंट्रोल बोर्ट ने कंपनी को बंद करने के आदेश दिए हैं. प्लांट की बिजली को भी काट दिया गया है.

 

 

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यूजीसी : गुटखा खाकर कहीं भी थूकने वाले हो जाएं सावधान…..

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नईदिल्ली 25 मई 2018। गुटखा खाकर कहीं भी थूकने वाले लोग अब होशियार हो जाएं। मोदी सरकार के स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत अभियान के यूजीसी ने एक नए अभियान की शुरुआत की है। यूजीसी ने सार्वजनिक जगहों पर थूकने की आदत को सामाजिक समस्या बताते हुए, इसके खिलाफ आवाज उठाने को कहा है।

फाइन का है प्रावधान

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के सभी विश्वद्यालयों से सार्वजनिक जगहों पर ‘थूकना मना है’ अभियान चलाने को कहा है। यूजीसी का कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान में प्रावधान है कि सार्वजनिक जगहों पर थूकने वाले लोगों पर सरकारी एजेंसियां फाइन लगा सकती हैं। लेकिन प्रावधान होने के बावजूद कुछ नहीं बदला है, जिसके चलते सरकार ने इस मुद्दे पर अलग से अभियान चलाने की पहल की है।

युवा बढ़ाएं जागरूकता

यूजीसी ने हाल ही में देश के सभी केन्द्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों को एक सर्कुलर जारी करके कहा है कि कहीं भी थूकने की आदत से टीबी जैसे संक्रामक रोग हो सकते हैं। यूजीसी के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों पर थूकना एक गंभीर समस्या है और हम लोगों में से अधिकांश रोजाना ऐसा होते हुए देखते हैं। यूजीसी ने अपने सर्कुलर के जरिए अपील की है कि जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए देश का युवा इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।

‘निकाली जाएं रैलियां’

यूजीसी ने अपने सर्कुलर में छात्रों से थूकने, कचरा फैलाने, हरियाली को नुकसान पहुंचाने और सार्वजनिक जगहों पर स्मोकिंग रोकने के लिए रैलियां निकालने और पब्लिक इवेंट के जरिए अभियान चलाने के लिए कहा है।

एनएसएस वॉलेंटियर्स भी लें हिस्सा

इसके अलावा यूजीसी ने अधिकांश कॉलेजों में चलने वाले नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) के वॉलेंटियर्स से भी इस सामाजिक समस्या पर हिस्सेदारी निभाने के लिए कहा है। साथ ही यूजीसी ने यह भी कहा है कि कैंपस में पोस्टर और स्टीकर्स के जरिए बताया जाए कि ऐसे लोग जो तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके थूकने से कई संक्रामक बीमारियां दूसरों को हो सकती हैं। सर्कुलर में यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और संबंधित कॉलेजों से इस विषय पर जरूरी कदम उठाने का आदेश भी दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिया था आइडिया

दो साल पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इस पर अभियान चलाने के लिए अलग से बजट की कोई व्यवस्था नहीं हैं, ले

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पुरी-हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस का नाश्ता खाने से 40 यात्रियों की तबियत खराब....

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कोलकाता, 23 मई 2018। पुरी-हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस का नाश्ता खाने से 40 यात्रियों की तबियत खराब हो गई। इनमें से 14 यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना बुधवार सुबह की है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि इस मामले की जांच करवाई जाएगी। ये सभी यात्री ट्रेन के कोच नंबर सी-1 और सी-2 में सफर कर रहे थे और इन्हें नाश्ता सुबह करीब सात बजे के बाद दिया गया था। यात्रियों ने नाश्ते के बाद जब पेट दर्द और उल्टी की शिकायत की तो ट्रेन के खड़गपुर पहुंचने पर करीब 11.45 बजे रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दक्षिण-पूर्व रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर संजॉय घोष ने बताया, ‘यह खाना आईआरसीटीसी ने सप्लाई किया था और ट्रेन में पुरी से रखा गया था। इसे खाने के बाद कुछ यात्रियों की तबियत खराब हो गई। उन यात्रियों का खड़गपुर में इलाज चल रहा है। इस मामले में आईआरसीटीसी और हमारी ओर से जांच की जाएगी।’

वहीं खड़गपुर डिविजनल के डीआरएम के. राबिन कुमार रेड्डी ने बताया, ‘खाने के सैंपल ले लिए गए हैं और हम लोग इस मामले में जरूरी कार्रवाई करेंगे। इसके अलावा हम इस मामले की भी जांच करेंगे कि क्या वेंडर ने बाहर से खाना तो नहीं लिया है।’ जहां रेड्डी का कहना है कि कुछ यात्री हॉकर्स से भी खाना ला सकते हैं, वहीं यात्रियों का कहना है कि उन्होंने वही खाना खाया है जो ट्रेन में परोसा गया है।

एक यात्री काकाली सेनगुप्ता ने कहा, ‘हमें भुवनेश्वर के बाद ट्रेन में ऑमलेट और ब्रेड परोसा गया था। इसे खाने के बाद हमारे पेट में दर्द शुरू हो गया और हम में से काफी लोगों को उल्टी होना शुरु हो गई।’ काकाली का अपने पति रूपम सेनगुप्ता के साथ अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनके दो बच्चे भी ट्रेन में नाश्ता का सेवन करने के बाद बीमार पड़ गए थे। ट्रेन पुरी से सुबह करीब 5.45 बजे निकली थी और नाश्ता 7 बजे परोसा गया था।

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