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सरकारी टेलिकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपने ग्राहकों के लिए 'डेटा सुनामी' नाम का नया ऑफर पेश किया है। इस पैक की कीमत 100 रुपये से भी कम है और इसमें यूजर्स को 1 जीबी से भी ज्यादा डेटा प्रतिदिन मिलेगा। कंपनी ने इस प्लान को 17 मई को मनाए गए 'वर्ल्ड टेलिकॉम डे' के अवसर पर पेश किया है। प्लान के तहत बीएसएनएल यूजर्स को 98 रुपये में 1.5 जीबी डेटा प्रतिदिन दिया जाएगा। इस प्लान की वैधता 28 दिन की होगी और इसका फायदा सिर्फ बीएसएनएल के प्रीपेड ग्राहकों को ही मिल पाएगा। कंपनी के मुताबिक, यह प्लान 17 मई से ही सभी सर्कल्स में उपलब्ध होगा।
हालांकि ध्यान रहे कि इस प्लान में ग्राहकों को अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। कॉलिंग के लिए उन्हें अलग से कोई पैक डलवाना होगा। यह भी बताते चलें कि बीएसएनएल फिलहाल 3G/2G नेटवर्क पर ही उपलब्ध है, कंपनी ने अभी तक 4जी सर्विस की शुरुआत नहीं की। माना जा रहा है कि कंपनी का यह प्लान जियो को टक्कर देने के लिए है। जियो भी अपने ग्राहकों को 98 रुपये के प्लान की सुविधा देती है, जिसमें 28 दिन के लिए कुल 2 जीबी डेटा मिलता है। हालांकि इसमें मुफ्त वॉइस कॉलिंग भी मिलती है।
नई दिल्ली: श्रम मंत्रालय ने भवन एवं अन्य निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों के कल्याण के लिए नि:शुल्क बीमा सुरक्षा, 60 वर्ष की उम्र के बाद प्रति माह हजार रुपये पेंशन, बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और चिकित्सकीय खर्च वहन करने का प्रस्ताव दिया है. मंत्रालय ने एक विशेष योजना का मसौदा जारी कर ये प्रस्ताव दिये हैं. मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर तैयार इस मसौदे पर लोगों की टिप्पणियां मंगायी है. इसपर 21 मई तक टिप्पणी की जा सकती है. योजना का मसौदा मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर डाला गया है. योजना में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मजदूरों को जीवन एवं शारीरिक अक्षमता से सुरक्षा देने के लिए राज्य और केंद्र द्वारा 171-171 रुपये का प्रीमियम वहन करने का प्रस्ताव है. योजना के तहत प्राकृतिक मौत होने पर दो लाख रुपये और दुर्घटना में मौत होने पर चार लाख रुपये देने का प्रस्ताव है. इसके अलावा शारीरिक अक्षमता की स्थिति में भी सुरक्षा के प्रावधान हैं.
मॉडल योजना के तहत कल्याण बोर्डों द्वारा प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक के चिकित्सकीय खर्च का भुगतान भी प्रस्तावित है. यह भुगतान बीमा कंपनियों के जरिये भी की जा सकती है. योजना में नौवीं से बारहवीं तक दो बच्चों के लिए प्रति वर्ष तीन हजार रुपये और आईआईटी , स्नातक एवं पेशेवर पाठ्यक्रमों जैसी उच्च शिक्षा के लिए 12 हजार रुपये प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति का प्रस्ताव है. योजना के तहत आवास , कौशल विकास एवं पेंशन जैसे लाभ का भी प्रस्ताव है. इसमें कहा गया है कि हजार रुपये पेंशन का लाभ उठाने के लिए मजदूरों को पांच वर्ष तक कल्याण बोर्ड में पंजीकृत होना अनिवार्य होगा.
नई दिल्ली: इंडियन रेलवे ने तत्काल बुकिंग के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। सिस्टम को चुस्त दुरुस्त करने के लिए समय—समय पर नियमों बदलाव में बदलाव किया जाता रहा है। एजेंट्स और दलालों को खत्म करने के लिए रेलवे ने यह खास कदम उठाया है। वर्तमान में नॉन-एसी टिकटों की बुकिंग इसके एक घंटे बाद यानी 11 बजे से शुरू होती है, जबकि एसी क्लास की टिकटों की तत्काल बुकिंग यात्रा तिथि से एक दिन पहले सुबह 10 बजे से होती है। बुकिंग शुरू होने के आधे घंटे तक अधिकृत एजेंट तत्काल टिकट नहीं बुक कर सकते हैं। सिंगल यूजर आईडी से एक दिन में सिर्फ 2 तत्काल टिकट बुक किए जा सकते हैं। एक आईपी अड्रेस से भी अधिकतम 2 तत्काल टिकट बुक हो सकते हैं। नए नियमों के तहत कुछ शर्तों के साथ तत्काल टिकट पर 100 प्रतिशत तक रिफंड ले सकते हैं।
ट्रेन के शुरुआती स्टेशन पर 2 घंटे लेट होने, रूट बदलने, बोर्डिंग स्टेशन से ट्रेन के नहीं जाने और कोच डैमेज होने या बुक टिकट वाली श्रेणी में यात्रा की सुविधा नहीं मिलने पर आप 100 प्रतिशत रीफंड मिल सकता है। रेलवे ने रजिस्ट्रेशन, लॉग इन और बुकिंग पेजों पर कैप्चा कोड की व्यवस्था की है। यह इसलिए किया गया है ताकि किसी ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जीवाड़ा करके कोई टिकट बुक न किया जा सके। इंटरनेट बैंकिंग के सभी पेमेंट ऑप्शंस के लिए OTP यानी वन टाइम पासवर्ड की एंट्री की व्यवस्था की गई है।
::/fulltext::नई दिल्ली 17 मई 2018 : दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार कहा कि देश में अगर सरकार भोजन या नौकरियां देने में असमर्थ है तो भीख मांगना एक अपराध कैसे हो सकता है? अदालत उन दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी, जिनमें भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर किए जाने का आग्रह किया गया था. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की एक पीठ ने कहा कि एक व्यक्ति केवल ‘भारी ज़रूरत’ के कारण ही भीख मांगता है न कि अपनी पसंद के कारण. अदालत ने कहा, ‘यदि हमें एक करोड़ रुपये की पेशकश की जाती है तो आप या हम भी भीख नहीं मांगेंगे. यह भारी ज़रूरत होती है कि कुछ लोग भोजन के लिए भीख के वास्ते अपना हाथ पसारते है. एक देश में जहां आप (सरकार) भोजन या नौकरियां देने में असमर्थ है तो भीख मांगना एक अपराध कैसे है?’
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि बॉम्बे प्रिवेंशन आॅफ बेगिंग एक्ट में पर्याप्त प्रावधान हैं. इस अधिनियम के तहत भीख मांगने को अपराध बताया गया है. केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि यदि ग़रीबी के कारण ऐसा किया गया है तो भीख मांगना अपराध नहीं होना चाहिए. यह भी कहा था कि भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर नहीं किया जायेगा. बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट को चुनौती देते हुए हर्ष मंदार और कर्णिका साहनी द्वारा दाख़िल जनहित याचिका में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के अलावा राष्ट्रीय राजधानी में भिखारियों को आधारभूत मानवीय और मौलिक अधिकार देने का आग्रह किया गया था.
केंद्र सरकार और दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने अक्टूबर 2016 में अदालत से कहा था कि सामाजिक न्याय मंत्रालय भीख मांगने को अपराध की श्रेणी के बाहर करने और उनके पुनर्वास को लेकर मसौदा तैयार कर रही है, लेकिन क़ानून में बदलाव करने के फैसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति पहली बार भीख मांगते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे तीन साल तक की सज़ा हो सकती है. इसके अलावा इस क़ानून के अंतर्गत 10 साल तक हिरासत में रखने का प्रावधान है. फिलहाल भीख मांगने के काम को रोकने के लिए केंद्र सरकार स्तर पर कोई क़ानून नहीं है. जितने भी राज्यों ने भीख मांगने के पेशे को अपराध की श्रेणी में रखा है, वे सभी बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट की तरह क़ानून को लागू किए हैं और कुछ ने उसमें थोड़ा बदलाव कर लागू किया है.
::/fulltext::मुंबई: नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने केबिन क्रू सदस्यों के अधिकतम ड्यूटी समय और आराम के लिए नए नियमों का प्रस्ताव किया है. इसके तहत एयरलाइन में काम से थक कर लौटे कर्मचारियों को पर्याप्त विश्राम के फिर ड्यूटी पर नहीं लगा पाएंगी, जिससे उड़ान की सुरक्षा सुनिश्चित होगी. ताजा नियमों के मसौदे के अनुसार लंबी उड़ानों वाले (16 घंटे या अधिक की उड़ान) पर केबिन क्रू सदस्यों को अधिकतम 22 घंटे तक ड्यूटी पर रखा जा सकेगा. यदि उड़ान आठ समय क्षेत्रों से गुजरती है तो केबिन क्रू सदस्य को आराम के लिए 36 घंटे का समय मिलेगा. दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार मई को डीजीसीए को केबिन क्रू और पायलटों की उड़ान ड्यूटी और आराम के घंटों के बारे में नए नियमों को तय करने को आठ सप्ताह का समय दिया था.
इसके अलावा अदालत ने नियामक उड़ान पर और ड्यूटी के समय की सीमा पर नागर विमानन आवश्यकता ( सीएआर ) के मसौदे को अपलोड करने के लिए आज तक का समय दिया था. नए सीएआर का निर्देश एक एनजीओ और लंबी उड़ानों पर काम करने वाले केबिन क्रू सदस्यों की याचिका पर दिया गया था. विमानन सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ और केबिन क्रू सदस्यों ने मौजूदा 2016 के नियमों को इस आधार पर चुनौती दी थी कि इसमें उनके ड्यूटी के घंटों के दौरान होने वाली थकान और आराम के समय पर ध्यान नहीं दिया गया है. एनजीओ ने दावा किया था कि केबिन क्रू सदस्य को थकान की वजह से उनकी खुद की और यात्रियों की सुरक्षा जोखिम में पड़ती है.