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Girls who don't marry are happier in life- जैसे ही घर की बेटियां 18 साल पार होती हैं, परिवार वालों को उसकी शादी की चिंता सताने लग जाती है। वो अपनी लाइफ में कितनी ही कामयाब क्यों ना हो, लेकिन जबतक उनकी शादी ना हो जाए सब बेकार है। परिवार और समाज का कहना है कि अगर वक्त पर शादी ना हो तो लड़कियों का जिंदगी खराब हो जाती है। उनका जिंदगी काटना मुश्किल हो जाता है।
लोग कहते हैं कि शादी के बाद बेटी तुम अपने पति के साथ खुश रहोगी,लेकिन ऐसा होता नहीं हैं। लड़की की पसंद ना होते हुए भी घर वालों की मर्जी से शादी करते हैं, फिर वो पूरी जिंदगी बस झेलती रहती है, इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन फर्क सिर्फ उस महिला को पड़ता है जो अपने पति के बुरे व्यवहार की पीड़ित होती है।
परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी उसे किसी तरह का कदम उठाने को मना करता है। लेकिन लड़कियों की शादी को लेकर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की स्टडी तो कुछ और ही कहानी बंया करती हैं।
अमेरिकन टाइम यूज़ सर्वे की रिपोर्ट
इसके साथ ही अमेरिकन टाइम यूज़ सर्वे (ATUS) के द्वारा भी एक सर्वे इस संबंध में किया गया। जिसमें शादीशुदा, गैरशादीशुदा, डिवोर्सी, विधवा महिलाओं के आराम और तकलीफ के लेवल पर सर्वे करने पर ये बात सामने आई की अविवाहित महिलाएं, विवाहित महिलाओं की तुलना में कम दुखी थीं। वहीं, शादीशुदा महिलाओं के पास विलासिता से संबंधित सबकुछ होने के वाबजूद वो खुश नहीं थीं। उनकी तकलीफें पति और परिवार से जुड़ी थी।
पीरियड्स किसी भी महिला की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। अमूमन पीरियड्स के दौरान महिला को मूड स्विंग्स से लेकर थकान होना या फिर पेट में दर्द आदि की शिकायत होती है।
लेकिन कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान वजाइनल एरिया पर पिंपल्स या फुंसी भी हो सकती है। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है। अगर आपको वजाइनल एरिया पर पिंपल्स की समस्या है तो यह काफी परेशान करने वाला हो सकता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि पीरियड्स के दौरान वजाइना में पिंपल्स क्यों होते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको इसके कारण व बचाव के उपायों के बारे में बता रहे हैं-
• पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तन के कारण वजाइनल एरिया में ब्लड फ्लो में भी परिवर्तन आता है। जिसके कारण यह एरिया सूज जाता है और इससे पिंपल्स हो सकते हैं।
• पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले सेनेटरी पैड और टैम्पोन फ्रिक्शन और जलन पैदा कर सकते हैं, जिसके कारण वजाइनल एरिया पर सूजन व पिंपल्स हो सकते हैं। यदि आप सैनिटरी पैड या टैम्पोन को बार-बार नहीं बदलते हैं, तो इससे स्किन में जलन हो सकती है और पिंपल्स या घाव विकसित हो सकते हैं।
• कभी-कभी वजाइनल बम्प्स की समस्या किसी मेडिकल कंडीशन की तरफ भी इशारा करती है। मसलन, यीस्ट इन्फेक्शन, बैक्टीरियल वेजिनोसिस या यौन संचारित संक्रमण के कारण महिला को पीरियड्स के दौरान वजाइनल बम्प्स का सामना करना पड़ सकता है।
वजाइनल बम्प्स से राहत पाने के उपाय
वजाइनल बम्प्स होने पर आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे कई तरीके होते हैं, जो आपको काफी राहत महसूस करवाते हैं।
• वजाइनल बम्प्स से राहत पाने के लिए आप हाइजीन का विशेष रूप से ध्यान रखें। इससे आपको इरिटेशन और इंफेक्शन से राहत मिलती है।
• वहीं, एक वॉर्म कंप्रेस सूजन और बेचैनी को कम करने में मददगार साबित होगा। आप एक साफ कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर उस एरिया पर लगाएं जहां आप असुविधा महसूस कर रही हैं।
• अगर आपकी समस्या बहुत बढ़ गई है तो ऐसे में आप ओवर-द-काउंटर क्रीम का प्रयोग करें। इस तरह की क्रीम खुजली और सूजन को कम कर सकती है। हालांकि, ऐसा करते समय आपको लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए और केवल कुछ ही समय के लिए क्रीम का उपयोग करें।
• अगर आपको वजाइनल बम्प्स के कारण दर्द व असुविधा हो रही है तो ऐसे में दर्दनिवारक दवाएं लेने से आपको काफी लाभ मिलेगा। हालांकि, किसी भी दवा का सेवन खुद से ना करें, बल्कि पहले डॉक्टर से परामर्श लें।
इन चीजों से बचें
अगर आपको वजाइनल बम्प्स की समस्या हो रही है तो ऐसे में अपनी स्थिति को बद से बदतर बनाने से बचने के लिए कुछ चीजों को अवॉयड करें। मसलन-
• कभी भी पिंपल्स को फोड़े नहीं। इससे जलन या संक्रमण और भी अधिक बढ़ सकता है।
• अगर आपको वजाइनल बम्प्स हो रहे हैं तो ऐसे में किसी भी हार्श साबुन या सुगंधित उत्पादों का प्रयोग न करें। इससे आपको स्किन में जलन हो सकती है। बेहतर होगा कि आप पानी का ही इस्तेमाल करें।
• जहां तक संभव हो, टाइट-फिटिंग कपड़े जैसे लेगिंग या टाइट जींस आदि पहनने से बचें। इससे आपके वजाइनल एरिया में घर्षण और जलन हो सकती है और आपकी स्थिति बद से बदतर हो सकती है।
Intimacy After C-section Delivery : सी सेक्शन यानी सिजेरियन ऑपरेशन कोई छोटी बात नहीं है। यह बहुत बड़ी सर्जरी होती है और इसके बाद रिकवर करने में महिलाओं का काफी समय लग जाता है। ऑपरेशन के बाद शरीर के घावों और टांकों से उभरने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता है। रिसर्च में भी सामने आया है कि नॉर्मल डिलीवरी और ऑपरेशन से बच्चा पैदा करने वाली महिलाओं को डिलीवरी के बाद पहले तीन महीनों में सेक्स करने में दिक्कत हो सकती है।
आइए जानते हैं सिजेरियन ऑपरेशन के बाद कब सेक्स कर सकते हैं और इस दौरान सेक्स लाइफ को फिर से शुरु करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
सी-सेक्शन C- Section पेट की सर्जरी है जिसके कारण महिलाओं को तब तक संबंध नही बनाना चाहिए जब तक की वह पूरी तरह से ठीक न हो जायें। यदि आपने हाल ही में सिजेरियन सेक्शन द्वारा बच्चे को जन्म दिया है, जिसे सी-सेक्शन के रूप में भी जाना जाता है, तो आपके सेक्स जीवन को फिर से शुरू करने के तरीके के बारे में आपके सवाल हो सकते हैं। आप यह मान सकते हैं कि चूंकि आपकी डिलीवरी वजाइनल नही थी, इसलिए आप तुरंत सेक्स कर सकते हैं - यह सच नहीं है, हालांकि यह एक ग़लतफहमी है।
6 हफ्ते का करें इंतजार
सिजेरियन डिलीवरी यदि सिजेरियन डिलीवरी हुई हैं तो कम से कम 6 हफ्तों बाद यौन संबंध बनाने चाहिए। लेकिन इसके बावजूद एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ली जानी चाहिए। ताकि डॉक्टर इस बात की जांच कर सकें कि आप के टांके ठीक से भरे हैं कि नहीं और आप की ऑपरेशन के बाद होने वाली ब्लीडिंग रुकी है कि नहीं। क्योंकि, प्रसव में ब्लीडिंग यूट्रस के अंदर से होती है, जहां पर प्लासेंटा स्थित होता है। हालांकि यह ब्लीडिंग हर गर्भवती महिला को होती है, चाहे उस की डिलीवरी नॉर्मल हुई हो या सिजेरियन।
डॉक्टर बताए तब शुरु करें सेक्स लाइफ
इन सब जांच के बाद अगर डॉक्टर आपको सेक्स की इजाजत दे देते हैं, तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि टांके पर किसी तरह का कोई दवाब न पड़े। क्योंकि, इस समय तक टांके पूरी तरह से ठीक नहीं होते हैं। ऐसे में सेक्स के दौरान अपने पोजीशन का जरूर ध्यान रखें। इसके अलावा, आप पेल्विक मसल्स को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज करें, इससे आपकी वजाइना मसल्स की मजबूती लौटने में मदद मिलेगी। जिससे कि आप सेक्स को एन्जॉय कर सकती हैं।
क्या सी-सेक्शन से सेक्स ड्राइव प्रभावित होगी?
सी-सेक्शन C- Section होने से आपकी सेक्स ड्राइव पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए, भले ही कई नए लम्हों में प्यार फिर से सही होने का एहसास न हो, जब छह सप्ताह का समय हो (और यह पूरी तरह से सामान्य हो)। एक बात के लिए, आप शायद अपने नवजात शिशु के दौर के कार्यक्रम से थक गए हैं। और स्तनपान करते समय आपके द्वारा जारी किए जाने वाले हार्मोन अस्थायी रूप से कम कामेच्छा के लिए भी जाने जाते हैं।
थोड़ा समय लें
डिलीवरी के बाद पहला सेक्स जरुरी नहीं हैं कि वैसा ही जैसे कंसीव होने से पहले होता था। शरीर और दिमाग को डिलीवरी के बाद के बदलावों के साथ एडजस्ट करने में समय लग सकता है इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें। फोरप्ले से शुरुआत करें। अगर रिलेशन बनाते वक्त किसी बात तकलीफ होती है, तो पार्टनर को अपनी तकलीफ जरुर बताएं। सी-सेक्शन के बाद आराम से और समय लेकर अपनी सेक्सुअल लाइफ को शुरु करें।
ऐसा कहा जाता है कि कपल्स को एक साथ चिपक कर सोना चाहिए, इस तरह से सोने से प्यार बढ़ता है। लेकिन सोने की आदतें सब की अलग-अलग होती है। सोने का पैटर्न दो लोगों का अलग अलग होता है और ये काफी हद तक लाइफ में नहीं बदलता है। आज के वक्त में पार्टनर से अलग रहने वाले कपल्स की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में अपने पर्सनल सोने के स्थान में आराम चाहने वालों के लिए, पति या पत्नी से अलग रात को सोने का अलग अनुभव पाते हैं, जिससे उनको नींद के दौरान आराम मिलता है
अलग-अलग नींद के पैटर्न या पर्सनल कंफर्ट की जरूरत के कारण, जो कपल अलग-अलग सोते हैं, वे इसका लाभ अच्छे से जानते हैं।
-साथ रहने वाले शादीशुदा कपल की तुलना में, अलग रहने वाले जोड़े अधिक सेक्सुअल सटिफेक्शन फील करते हैं।
-रोमांटिक रिलेशनशिप में क्लोजनेस बहुत जरूरी है। लेकिन इतनी ही दूरी ही अच्छी जो कपल को फायदा पहुंचाए।
टेपोंरल डिस्डेंस
पति और पत्नी के बीच प्यार में सबसे छोटी भी बहुत लंबी दूरी होती है। लेकिन इस दूरी को कपल आपसी प्यार और भरोसे से पाट लेते हैं। पैशन और एक्साइटमेंट इमोशन को और तेज बना देते हैं, जब दो लोग दूर होते हैं और फिर मिलते हैं।
कपल्स की भौगोलिक निकटता
आज के रोमांटिक कपल्स अपने करियर या फिर दूसरी वजहो से दूर रहते है। दूसरे शहरों या फिर देश से बाहर रहते हैं। लेकिन इनका जब मिलन होता है वो बहुत ही प्यार से भरा और रोमांटिक होता है, जो एक साथ रहने वाले कपल के बीच नहीं हो पाता है। ये मिलन बहुत ही मूल्यवान होता है। इन रिलेशनशिप में कपल ज्यादा पर्सनल प्लेस से फायदा उठाते हैं।
क्या अलग सोना फायदेमंद है?
अलग सोना,जिसमें अलग बेड पर सोना, टेंपोररी और जियोग्रफिकल दूरी भी शामिल है। आज के वक्त में लगभग एक तिहाई अमेरिकन कपल्स इसी तरह से रात को सोते हैं। लेकिन फिर भी भारत जैसे देश में अलग सोने का मतलब आपसी मतभेद ले लगा लिया जाता है, या फिर कपल के बीच लड़ाई-झगड़े को लेकर अलग बेड पर सोने से मतलब समझा जाता है। लेकिन ये धारणा गलत है। कभी-कभी अलग-अलग सोना प्यार और क्लोजनेस को बढ़ाने का काम करता है।