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बेंगलुरू : भ्रष्टाचार के आरोप और एक ठेकेदार की खुदकुशी में कथित भूमिका को लेकर विवादों में घिरे बीजेपी के दिग्गज नेता और कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई को सौंप दिया है. इस्तीफा देने से पहले, केएस ईश्वरप्पा (KS Eshwarappa) ने आज अपने समर्थकों से चिंता नहीं करने को कहा था क्योंकि 'वे वापस लौटेंगे'. शक्ति प्रदर्शन के तहत वे कारों के एक काफिले के साथ राजधानी बेंगलुरू पहुंचे थे. उधर, शिवमोगा में ईश्वरप्पा के समर्थकों ने उनका 'जबरन इस्तीफा' लिए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया. ईश्वरप्पा ने संवाददाताओं से चर्चा में कहा था, "मैं पार्टी में अपने वरिष्ठों और शुभचिंतकों के लिए कोई परेशानी खड़ी करना नहीं चाहता. इसलिए मैं इस्तीफा सौंपने के लिए शाम को मुख्यमंत्री से मिलने जा रहा हूं." बाद में उन्होंने सीएम से मुलाकात कर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया.
कांग्रेस विधायक प्रियांक खड़गे के '40% मनी स्कैंडल' में कुछ और लोगों के शामिल होने के आरोपों पर ईश्वरप्पा ने कहा था, 'वे (खड़गे) मामले में शामिल एक भी शख्स का नाम क्यों नहीं ले रहे?'गौरतलब है कि बोम्मई सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री ईश्वरप्पा पर एक कांट्रेक्टर संतोष पाटिल ने "कमीशन" मांगने के आरोप लगाए थे. पाटिल ने कथित तौर पर मंगलवार को खुदकुशी कर ली थी. संतोष के पाटिल का शव उडुपी में एक निजी लॉज के कमरे में मिला था. इस ठेकेदार ने व्हाट्सएप संदेश में ईश्वरप्पा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया.इस संदेश में उन्होंने आरोप लगाया था कि उसकी मृत्यु के लिए ईश्वरप्पा जिम्मेदार हैं. खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताने वाले पाटिल ने आरोप लगाया था कि उसने आरडीपीआर विभाग में एक काम किया था और चाहते थे कि इसका भुगतान हो, लेकिन ईश्वरप्पा ने चार करोड़ रुपये के काम में 40 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी.
संतोष पाटिल को कथित तौर पर मंत्री (ईश्वरप्पा) की मौखिक सहमति पर चार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम दिया गया था लेकिन 18 माह के बाद भी उसका भुगतान नहीं हुआ था. इस काम के लिए संतोष ने बड़ी राशि उधार ली थी यहां तक कि उसने अपनी पत्नी की ज्वैलरी भी गिरवी रखी थी. राज्य की शक्तिशाली ठेकदार लॉबी ने स्वीकार किया है कि मौजूदा समय में कमीशन की संस्कृति की है जो कि 40 फीसदी से अधिक है.
इस बीच, कर्नाटक में बीजेपी के प्रभावी नेता और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा अपने 'पुराने दोस्त' के समर्थन में खड़े नजर आए. येदियुरप्पा ने विश्वास जताया कि वे (ईश्वरप्पा) सभी आरोपों से बेदाग होकर निकलेंगे और जल्द ही मंत्री पद पर वापसी करेंगे.'ईश्वरप्पा की ओर से कल इस्तीफा देने का ऐलान, कर्नाटक के सीएम बासवराज बोम्मई की ओर से फिलहाल 'मंत्री' के सरकार में बने रहने के बयान के कुछ घंटों बाद आया था. NDTV के साथ खास बातचीत में सीएम बोम्मई ने कहा था.
बेंगलुरु: कर्नाटक में ठेकेदार संतोष पाटिल की खुदकुशी के मामले में घिरे कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री केएस ईश्वरप्पा आज इस्तीफा देने वाले हैं. उन्होंने संवाददाताओं से गुरुवार को कहा था कि , "मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया क्योंकि मैं उन लोगों को असहज स्थिति में नहीं डालना चाहता, जिन्होंने मुझे इस पद तक पहुंचाने में मदद की है. जैसे कि पार्टी में वरिष्ठ नेता और हमारे मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई जी".
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री केएस ईश्वरप्पा पर 40 फीसदी कमीशन मांगने का आरोप लगा है. आरोप लगाने वाला ठेकेदार मंगलवार सुबह उडुपी के एक लॉज में मृत मिला था.
आत्महत्या करने वाले पाटिल ने खुद को बीजेपी का कार्यकर्ता बताया था. उन्होंने 30 मार्च को आरोप लगाया था कि उसने आरडीपीआर विभाग में एक काम किया था और चाहते थे कि इसका भुगतान हो. लेकिन ईश्वरप्पा ने चार करोड़ रुपये के काम में 40 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी.
पाटिल ने कुछ मीडिया संस्थानों को कथित तौर पर कुछ संदेश भेजा था. जिसमें कहा था कि वे आत्महत्या कर रहा है और आरोप लगाया कि उसकी मृत्यु के लिए ईश्वरप्पा जिम्मेदार हैं.
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस के अनुसार, बेलगावी जिले के संतोष के पाटिल का शव निजी लॉज के एक कमरे में मिला था. पुलिस ने बताया कि आत्महत्या के समय उसके दोस्त उसके बगल के कमरे में ठहरे हुए थे.
ये मामला सामने आने के बाद विपक्षी पार्टियां ईश्वरप्पा के इस्तीफे की मांग कर रही है. आम आदमी पार्टी (आप) की कर्नाटक इकाई ने गुरुवार को ठेकेदार संतोष पाटिल की मौत के मामले में राज्य मंत्री केएस ईश्वरप्पा की तत्काल गिरफ्तारी और जांच की मांग की थी.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बृहस्पतिवार को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (आरडीपीआर) मंत्री के. एस. ईश्वरप्पा के खिलाफ तब तक किसी कार्रवाई से इनकार किया था. जब तक प्रारम्भिक जांच पूरी न हो जाए. मुख्यमंत्री ने कहा था कि संतोष पाटिल की कथित आत्महत्या मामले की व्यापक जांच की जाएगी और सच्चाई सामने आएगी. प्रारम्भिक जांच के आधार पर ही सरकार ईश्वरप्पा के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लेगी.
वहीं इस मामले पर ईश्वरप्पा ने पहले बयान देते हुए कहा था कि उन्हें आत्महत्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा था कि, ‘‘इस्तीफा देने का सवाल ही पैदा नहीं होता. मैंने संतोष पाटिल के खिलाफ जो मामला दायर कराया है, हमें अदालत में उसका फैसला आने का इंतजार करना होगा."
ईश्वरप्पा ने ये भी कहा था कि वे विपक्ष के दबाव में इस्तीफा नहीं देंगे. "शव के पास कोई डेथ नोट नहीं मिला है". हालांकि अब ईश्वरप्पा इस्तीफा देने के लिए तैयार हो गए.
सूत्रों ने अनुसार भाजपा आलाकमान के दबाव के कारण ये इस्तीफा देने को तैयार हुए हैं. भाजपा आलाकमान ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी छवि को बचाने के लिए ईश्वरप्पा को पद छोड़ देना चाहिए.
भाजपा आलाकमान के आदेश पर मंत्री ईश्वरप्पा आज मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं.
नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा से 12 BJP विधायकों का एक साल के लिए निलंबन (12 BJP MLAs Suspension) सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रद्द कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये निलंबन असंवैधानिक और मनमाना है. SC ने फैसले में कहा कि ये निलंबन जुलाई 21 में चल रहे मानसून सत्र के लिए ही हो सकता था.
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को मैराथन सुनवाई के बाद BJP विधायकों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना था कि महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा विधायकों का एक साल का निलंबन सही है या नहीं. शीर्ष न्यायालय ने आज अपना फैसला सुनाया.
अदालत ने पक्षकारों को एक हफ्ते में लिखित दलीलें देने को कहा था. हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा के एक साल के निलंबन पर तीखी टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये फैसला लोकतंत्र के लिए खतरा है और तर्कहीन है. पीठ ने महाराष्ट्र राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील आर्यमा सुंदरम से सत्र की अवधि से आगे निलंबन की तर्कसंगतता के बारे में कड़े सवाल किए थे.
जस्टिस खानविलकर ने अपनी टिप्पणी में कहा था, "जब आप कहते हैं कि कार्रवाई तर्कसंगत होनी चाहिए, तो वहां निलंबन का कुछ उद्देश्य होना चाहिए और उद्देश्य सत्र के संबंध में है. इसे उस सत्र से आगे नहीं जाना चाहिए. इसके अलावा कुछ भी तर्कहीन होगा. असली मुद्दा निर्णय की तर्कसंगतता के बारे में है और वही किसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए कोई भारी कारण होना चाहिए. 6 महीने से अधिक समय तक निर्वाचन क्षेत्र से वंचित रहने के कारण आपका 1 वर्ष का फैसला तर्कहीन है. हम अब संसदीय कानून की भावना के बारे में बात कर रहे हैं. यह संविधान की व्याख्या है जिस तरह से इससे निपटा जाना चाहिए."
जस्टिस सीटी रविकुमार ने कहा था कि एक और बात चुनाव आयोग को भी मिली. जहां रिक्ति होगी, वहां चुनाव होना है. निलंबन के मामले में, चुनाव नहीं होगा, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को निष्कासित कर दिया जाता है तो चुनाव आयोजित किया जाएगा. ये लोकतंत्र के लिए खतरा है. मान लीजिए बहुमत की एक छोटी बढ़त है, और 15/20 लोगों को निलंबित कर दिया जाता है, तो लोकतंत्र का भाग्य क्या होगा?
निलंबित किए गए BJP विधायक
निलंबित किए गए 12 भाजपा विधायकों में आशीष शेलार, गिरिश महाजन, अभिमन्यु पवार, अतुल भातखलकर, नारायण कुचे, संजय कुटे, पराग अलवणी, राम सातपुते, हरीश पिंपले, जयकुमार रावल, योगेश सागर और कीर्ति कुमार बागडिया के नाम शामिल हैं.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने पद्म विभूषण का पुरस्कार ठुकरा दिया है. उनकी ओर से कहा गया है कि किसी ने भी उन्हें यह सम्मान दिए जाने के बारे में कोई सूचना नहीं दी. पीटीआई ने बुद्धदेब के हवाले से कहा है कि अगर सचमुच में उन्होंने मुझे पद्म भूषण देने की घोषणा की है तो मैं इसे अस्वीकार कर सकता हूं. उल्लेखनीय है कि पद्म पुरस्कारों की सूची में विपक्षी दल के नेता बुद्धदेब के साथ गुलाम नबी आजाद का भी नाम शामिल है. साथ ही यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भी मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने का ऐलान किया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य ने मंगलवार को पद्म भूषण सम्मान को अस्वीकार कर दिया.
माकपा सूत्रों के अनुसार यह भट्टाचार्य के साथ ही पार्टी का भी फैसला है. UP के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कल्याण सिंह और हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुए भारत के पहले CDS जनरल बिपिन रावत को मंगलवार को मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है.
बुद्धदेब वर्ष 2000 से 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे हैं. वो जादवपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार 24 साल तक विधायक निर्वाचित हुए. वो माकपा के शीर्ष नीति निकाय पोलितब्यूरो के भी सदस्य रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस के बंगाल में जीत के पहले वो ही बंगाल के मुख्यमंत्री रहे. हालांकि सिंगुर और नंदीग्राम जैसे आंदोलन के कारण उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी.
वहीं बुद्धदेब भट्टाचार्य के पद्म भूषण पुरस्कार ठुकराए जाने को लेकर कांग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश का ट्वीट भी सुर्खियों में आ गया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'सही काम किया, वो गुलाम नहीं आजाद रहना चाहते हैं.'
इस साल जिन चार हस्तियों को पद्म विभूषण देने का ऐलान किया गया है, उसमें महाराष्ट्र से कला क्षेत्र में प्रभा अत्रे, यूपी से साहित्य एवं शिक्षा क्षेत्र में राधेश्याम खेमका मरणोपरांत) , उत्तराखंड से सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में जनरल बिपिन रावत (मरणोपरांत) और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (मरणोपरांत) शामिल हैं.
जबकि पद्म भूषण सम्मान पाने वाले 17 लोगों की लिस्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद का नाम सबसे ऊपर है. उन्हें सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में यह सम्मान दिया गया है. बुद्धदेब भट्टाचार्य को भी सार्वजनिक मामलों के क्षेत्र में यह सम्मान देने का ऐलान किया गया था.