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मुख्यमंत्री श्री साय को जशपुर की बहनों ने बांधी राखी
रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक – मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के गृह ग्राम बगिया स्थित कैंप कार्यालय में रक्षाबंधन के अवसर पर विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित बहनों ने राखी बांधकर आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना की हितग्राही दीदियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएँ, मितानिन और स्व-सहायता समूह की बहनों ने भी मुख्यमंत्री श्री साय की कलाई पर राखी बांधी और उनके दीर्घायु की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते, स्नेह और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और मोदी जी की गारंटी का अर्थ है—वादा पूरा होने की गारंटी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जशपुर के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जशपुर जिले में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, फिजियोथेरेपी एवं उद्यानिकी कॉलेज, 200 बिस्तरों का अस्पताल और बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए हर्राडांड (कुनकुरी) में प्रदेश का पाँचवाँ पावर प्लांट स्थापित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जशपुर के विकास में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।
इस अवसर पर श्री उपेंद्र यादव, श्री सुनील गुप्ता, सरगुजा कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण, स्व-सहायता समूह की दीदियाँ और हितग्राही महिलाएँ बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।
पत्रकार बहनों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर बांधी राखी : जनसेवा के मार्ग पर अटूट संकल्प और प्रगति की दी शुभकामनाएं
रायपुर-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रदेश की सभी बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें रिश्तों की पवित्रता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान एवं सुरक्षा के संकल्प की याद दिलाता है।
इस अवसर पर पुलिस लाइन हेलीपैड में उपस्थित पत्रकारिता जगत से जुड़ी बहनों ने मुख्यमंत्री श्री साय की कलाई पर राखी बाँधकर उनके दीर्घायु की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी पत्रकार बहनों के स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यूँ तो रायपुर की पत्रकार बहनों से अक्सर मुलाक़ात होती है।विभिन्न विषयों पर चर्चा-परिचर्चा और सवाल-जवाब भी होते हैं। पर आज का दिन कुछ ख़ास था। आज इन बहनों ने अपने इस भाई की कलाई पर राखी का पवित्र धागा बाँध अपना विशेष स्नेह दिया। इस प्रेम और विश्वास का मैं आभारी हूँ। यह बंधन मुझे हर दिन अपनी जिम्मेदारियों को और निष्ठा से निभाने की शक्ति देगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी बहनों के सुखमय, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की मंगलकामनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि यह पवित्र बंधन उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक निष्ठा एवं समर्पण के साथ निभाने की शक्ति प्रदान करेगा।
खरगा की पूनम की मुस्कान में झलकता सुनहरे भविष्य का सपना
युक्तियुक्तकरण से बदला छोटे से गाँव का शैक्षिक परिदृश्य
रायपुर-बिलासपुर जिला के कोटा ब्लॉक का छोटा सा ग्राम खरगा अब शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। इस गाँव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय की छात्रा पूनम धृतलहरे की आंखों में अब आत्मविश्वास और उम्मीद दोनों चमकते हैं। मेहनती और होशियार पूनम शुरू से पढ़ाई में आगे रही है, लेकिन लंबे समय से यह विद्यालय एकल शिक्षकीय था, जिससे उसकी और उसके साथियों की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। कठिन सवालों के उत्तर न मिल पाने से बच्चे धीरे-धीरे उत्साह खोने लगे थे और कुछ तो स्कूल छोड़ने की सोच भी रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए युक्तियुक्तकरण ने इस गाँव के बच्चों की जिंदगी में नई दिशा दी। विद्यालय में पहले से कार्यरत शिक्षक श्री संतोष कुमार खांडे के साथ अब श्री मुकेश कुमार यादव की नियुक्ति होने से कक्षाओं में नई ऊर्जा और बेहतर शिक्षण वातावरण आया। दो शिक्षकों की मौजूदगी ने न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारी, बल्कि बच्चों का स्कूल से जुड़ाव भी बढ़ाया।
पूनम और उसके सहपाठियों का कहना है कि अब वे कठिन से कठिन प्रश्न हल करना सीख गए हैं और पढ़ाई में मजा आने लगा है। पालकों ने भी मुख्यमंत्री के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब उनके बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, जिससे वे भी शहर के बच्चों की तरह बड़े सपने देख और पूरे कर सकेंगे।
खरगा जैसे छोटे गाँवों में जब शिक्षक समय पर पहुँचते हैं, तो यह बदलाव केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गाँव के भविष्य को दिशा देता है। आज पूनम और उसके साथी न सिर्फ मन लगाकर पढ़ रहे हैं, बल्कि आने वाले समय में अपने गाँव और राज्य का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं।
छत्तीसगढ़ में ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत – पशुधन सुरक्षा, नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
गौधाम योजना से पशुधन संरक्षण, नस्ल सुधार और रोजगार में आएगा नया आयाम – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
रायपुर- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और पशुधन संरक्षण को नई दिशा देने के लिए गौधाम योजना की शुरुआत करने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल पशुधन की सुरक्षा और नस्ल सुधार को बढ़ावा देगी, बल्कि जैविक खेती, चारा विकास और गौ-आधारित उद्योगों के माध्यम से गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी। योजना का स्वरूप इस तरह तैयार किया गया है कि निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं की देखभाल के साथ-साथ चरवाहों और गौसेवकों को नियमित आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध हो, जिससे ग्रामीण जीवन में आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता आ सके। गौधाम योजना के ड्राफ्ट को वित्त एवं पशुधन विकास विभाग से भी मंजूरी मिल चुकी है।
गौधाम योजना का उद्देश्य गौवंशीय पशुओं का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन करना, गौ-उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहित करना, गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करना, ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना तथा फसलों के नुकसान और दुर्घटनाओं में पशु एवं जनहानि से बचाव सुनिश्चित करना है।
अवैध तस्करी और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस*
पशुधन विकास विभाग ने यह योजना विशेष रूप से तस्करी या अवैध परिवहन में पकड़े गए पशुओं और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की है। राज्य में अवैध पशु तस्करी एवं परिवहन पर पहले से रोक है। अंतरराज्यीय सीमाओं पर पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में गौवंशीय पशु जब्त होते हैं। इन पशुओं और घुमंतु पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए ही यह योजना शुरू की जा रही है। प्रत्येक गौधाम में क्षमता के अनुसार अधिकतम 200 गौवंशीय पशु रखे जा सकेंगे।
गौधाम योजना के तहत चरवाहों को 10,916 रुपए प्रतिमाह और गौसेवकों को 13,126 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही मवेशियों के चारे के लिए प्रतिदिन निर्धारित राशि प्रदान की जाएगी। उत्कृष्ट गौधाम को वहां रहने वाले प्रत्येक पशु के लिए पहले वर्ष 10 रुपए प्रतिदिन, दूसरे वर्ष 20 रुपए प्रतिदिन, तीसरे वर्ष 30 रुपए प्रतिदिन और चौथे वर्ष 35 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जाएगी। योजना के लिए बजट, नियम और शर्तें तय कर दी गई हैं, ताकि संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो।
मुख्यमंत्री श्री साय – “पशुधन की सुरक्षा और गांवों में रोजगार बढ़ाएगी गौधाम योजना”
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि गौधाम योजना से प्रदेश में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और बड़ी संख्या में चरवाहों एवं गौसेवकों को नियमित आय का साधन मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पशुओं की नस्ल सुधार कर उन्हें अधिक दूध देने और खेती-किसानी में पूरी क्षमता से उपयोग करने योग्य बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और चारा विकास कार्यक्रमों को भी गति मिलेगी, जिससे ग्राम स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
गौधाम की स्थापना के लिए चयनित होगी उपयुक्त शासकीय भूमि
ऐसी शासकीय भूमि, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशुओं के शेड, पर्याप्त पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध हो, वहीं गौधाम की स्थापना की जाएगी। जिन गौठानों में पहले से अधोसंरचना विकसित है, वहां उपलब्धता के आधार पर गौठान से सटे चारागाह की भूमि को हरा चारा उत्पादन के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि आसपास की पंजीकृत गौशाला की समिति संचालन हेतु असहमति व्यक्त करती है, तो अन्य स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी या सहकारी समिति संचालन के लिए आवेदन कर सकेगी।
जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जो पंजीकृत गौशालाओं से भिन्न होंगे। पहले चरण में छत्तीसगढ़ के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गौधाम स्थापित किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों का तुलनात्मक अध्ययन कर चयनित संस्था का नाम छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजेगी। मंजूरी के बाद चयनित संस्था और आयोग के बीच करार होगा, जिसके पश्चात गौधाम का संचालन उस संस्था को सौंपा जाएगा।
गोबर खरीदी नहीं होगी, चारा विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
गौधाम में गोबर खरीदी नहीं होगी, पशुओं के गोबर का उपयोग चरवाहा स्वयं करेगा। यहां निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं को ही रखा जाएगा और उनका वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन होगा। संचालन में गौशालाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य गौ सेवा आयोग में पंजीकृत गौशाला की समिति, स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनी और सहकारी समिति संचालन के लिए पात्र होंगी। गौधाम को वहां रहने वाले पशुओं की संख्या के आधार पर राशि दी जाएगी। गौधाम से सटी भूमि पर चारा विकास के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी—एक एकड़ में चारा विकास कार्यक्रम पर 47,000 रुपए और पांच एकड़ के लिए 2,85,000 रुपए का प्रावधान है।
गौधाम बनेंगे प्रशिक्षण केंद्र, बढ़ावा मिलेगा गौ उत्पादों को
प्रत्येक गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। संचालनकर्ता समिति या संस्था ग्रामीणों को गौ-उत्पाद विषय पर प्रशिक्षण देगी और उन्हें गौ-आधारित खेती के लिए प्रेरित करेगी। इसके साथ ही गोबर और गौमूत्र से केंचुआ खाद, कीट नियंत्रक, गौ काष्ठ, गोनोइल, दीया, दंतमंजन, अगरबत्ती आदि बनाने का प्रशिक्षण, उत्पादन और बिक्री के लिए भी गौधाम एक माध्यम बनेंगे।