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नई दिल्ली : चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल बिपिन रावत (CDS Gen Bipin Rawat) का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया है. जनरल रावत, उनकी पत्नी सहित 14 लोग भारतीय वायुसेना (IAF) के जिस हेलीकॉप्टर में सवार थे, वह आज दोपहर तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. Mi सीरीज के हेलीकॉप्टर ने सुलुर (Sulur) आर्मी बेस से उड़ान भरी थी, इसके कुछ ही देर बाद यह नीलगिरि में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है जबकि बचने में सफल रहे एक शख्स का बुरी तरह से झुलसने के कारण इलाज किया जा रहा है. जनरल रावत के अलावा उनकी पत्नी, उनके डिफेंस असिस्टेंट, सुरक्षा कमांडोज और भारतीय वायुसेना के जवान हेलीकॉप्टर में थे. भारतीय वायुसेना की ओर से एक ट्वीट में कहा गया है ,'बेहद अफसोस के साथ बताना पड़ रहा है कि जनरल बिपिन रावत, श्रीमती मधुलिका रावत और हेलीकॉप्टर में सवार 11 अन्य लोगों की 'इस दुर्घटना में मृत्यु हो गई है. '
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद सत्र के दौरान सांसदों की गैरहाजिरी पर सख्त रुख अख्तियार किया है. बीजेपी संसदीय दल की बैठक में उन्होंने कहा कि सदन में सभी सांसदों को रहना चाहिए. चाहे कोई बिल हो या ना हो. पीएम ने सख़्ती से कहा कि सांसद अपने में परिवर्तन लाएं नहीं तो परिवर्तन अपने आप हो जाएगा. पीएम ने बीजेपी सांसदों से कहा, 'कृपया संसद और बैठकों में नियमित रूप से उपस्थित रहे. बच्चों की तरह इस बारे में लगातार जोर देना मेरे लिए अच्छा नहीं है. अगर आप खुद को नहीं बदलते हैं तो आने वाले समय में बदलाव होंगे. '
पीएम का यह सख्त रुख ऐसे समय सामने आया है जब संसद के शीत सत्र में विपक्ष एकजुटता दिखाते हुए सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है. विपक्ष की ओर से नगालैंड फायरिंग और सांसदों के निलंबन सहित विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरा जा रहा है. गौरतलब है कि इससे पहले, संसद के मॉनसून सेशन के दौरान भी राज्यसभा में बीजेपी सांसदों की गैरहाजिरी के मसले पर पीएम ने नाराजगी जताई थी. सूत्रों ने यह जानकारी दी थी. मॉनसून सत्र के दौरान उच्च सदन में बिल पारित होते समय कई सांसद मौजूद नहीं थे, इसे लेकर पीएम ने सख्त रुख अपनाया था. यही नहीं, उन्होंनेसंसदीय दल की बैठक में राज्यसभा से गैरमौजूद रहे सांसदों के नाम भी मांगे थे.
नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पीएम मोदी ने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा करने को तैयार है. सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठे लेकिन सदन और स्पीकर की गरिमा का ख्याल रखे. उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, हम चाहेंगे, देश भी चाहेगा कि भारत की संसद ये सत्र और आने वाले सभी सत्र, आजादी के दीवानों की भावनाओं के अनुकूल देशहित में चर्चाएं करें, देश की प्रगति के लिए रास्ते खोले.
पीएम मोदी ने कहा, संसद का ये सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है. देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, हिंदुस्तान में चारों दिशाओं में आजादी के अमृत महोत्सव निमित रचनात्मक, सकारात्मक, जनहित, राष्ट्रहित के लिए, सामान्य नागरिक अनेक कार्यक्रम कर रहे हैं. आजादी के दीवानों ने जो सपने देखे थे, उन सपनों को पूरा करने के लिए देश का सामान्य नागरिक भी कोई न कोई दायित्व निभाने का प्रयास कर रहा है. ये अपने आप में भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभ संकेत है.
साथ ही कहा, संविधान दिवस पर भी नए संकल्प के साथ संविधान की आत्मा को चरितार्थ करने के लिए हर किसी के दायित्व के संबंध में पूरे देश ने एक संकल्प किया है. भविष्य में संसद को कैसा चलाया, कितना अच्छा योगदान दिया, कितना सकारात्मक काम हुआ, उस तराजू पर तोला जाए. न कि मापदंड ये होना चाहिए कि किसने कितना जोर लगाकर सत्र को रोका. सरकार हर विषय पर चर्चा करने को तैयार है. सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठे लेकिन सदन और स्पीकर की गरिमा का ख्याल रखें.
कोरोना पर पीएम मोदी ने कहा, पिछले सत्र में कोरोना के बाद 100 करोड़ वैक्सिन दिए अब 150 करोड़ की ओर बढ़ रहे है. नए वैरिएंट भी डरा रहा है. इससे सतर्क रहें. 80 करोड़ लोगो के घर मुफ्त खाना दिया जा रहा है.
नई दिल्ली : कोविड-19 के नए वेरिएंट Omicron (ओमिक्रॉन वेरिएंट) को लेकर पूरी दुनिया 'अलर्ट' मोड पर है. भारत में हालांकि इसका कोई मामला नहीं है लेकिन सरकार अपनी तरफ से पूरी सजगता बरत रही है. केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को संसद में बताया गया कि देश में अब तक Omicron (ओमिक्रोन) का एक भी मामला नहीं आया है. आगे इसका कोई मामला नहीं आये, उसका भी पूरा प्रयास किया जा रहा है.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने आज कहा, 'देश में अब तक ओमिक्रोन का एक भी केस नहीं मिला है. आगे इसका कोई मामला नहीं आये, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि कोविड कंट्रोल में है, लेकिन यह पूरी तरह गया नहीं है. 124 करोड़ डोज अब तक लग चुके हैं.'
सोमवार को आईसीएमआर में Head of Epidemiology डॉ. समीरन पांडा ने NDTV से बात करते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा था, 'मुझे कोई हैरानी नहीं होगी अगर भारत में इसका (वेरिएंट का) पता चलता है. यह केवल समय की बात है. यह वेरिएंट उच्च संक्रामक क्षमता के साथ फैलता है. '
Omicron के कई देशों में फैलने से बढ़ती चिंताओं के बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ एक समीक्षा बैठक की और उन्हें मामलों की शीघ्र पहचान और प्रबंधन के लिए जांच बढ़ाने की सलाह दी.
राज्यों को सुझाव दिया गया है कि अंतराष्ट्रीय यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखें और At Risk कैटेगरी के देशों से आने वाले हर यात्री का एयरपोर्ट पर आरटी पीसीआर टेस्ट हो. सभी पॉजिटिव सैंपल को insacog भेजें. साथ ही उनकी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और पॉजिटिव यात्रियों को 14 दिनों तक फॉलोअप किया जाए.इसके साथ ही जिलों में टेस्टिंग की संख्या बढ़ाने को भी कहा गया है.
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई समझाइश में यह भी कहा गया कि हॉटस्पॉट या मामलों के क्लस्टर बन रहे इलाकों के सभी पॉजिटिव सैंपल Insacog लैब भेज जाएं.. यह भी कहा गया है कि At risk देशों से आए यात्रियों की निगरानी सही तरीके से हो. अस्पताल इंफ्रा को दुरुस्त रखने की जरूरत भी इस दौरान बताई गई.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भूषण ने यह रेखांकित करते हुए कि ऐसा नहीं है कि नया स्वरूप आरटी-पीसीआर और आरएटी जांच से पकड़ में नहीं आ सकता है, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पर्याप्त बुनियादी ढांचा और निगरानी वाले घरेलू पृथक-वास सुनिश्चित करने के लिए कहा.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर, हांगकांग और इजरायल से आने वाले पैसेंजर्स को जोखिम वाले देशों (at risk)की श्रेणी में रखा है.
जोखिम वाले देशों से आने वाले पैसेंजर्स का एयरपोर्ट पर RT-PCR टेस्ट किया जाएगा. नियमों के अनुसार, जोखिम वाले देशों के जिन लोगों की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव होगी, उन्होंने भी घर में सात दिनों तक क्वारंटाइन रहना होगा. आठवें दिन उनका फिर टेस्ट किया जाएगा.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यही नहीं, अन्य देशों से आने वाले यात्रियों में से 5 फीसदी की भी रैंडम टेस्टिंग की जाएगी.किसी का सैंपल पॉजिटिव आने की स्थिति में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाएगा और उसे क्वारंटाइन किया जाएगा.
ऐसे देशों से आने वाले लोगों, जो कि जोखिम वाले देशों की श्रेणी में नहीं हैं और जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है, के मामले में भी सावधानीपूर्वक निगरानी की सलाह दी गई है.
नई दिल्ली: पर्यावरण के नाम पर भारत पर कई तरह के दबाव डाले गए, ये औपनिवेशक मानसिकता का परिणाम है. यह बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के संविधान दिवस समारोह के कार्यक्रम के दौरान कहीं. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हम सभी अलग-अलग भूमिका निभाते हैं. हमारे काम की प्रकृति अलग है. लेकिन हमारा मार्गदर्शक स्रोत और दिशानिर्देश संविधान है. आज बहुत अच्छा दिन है. हमें अपने संविधान निर्माताओं के उस सपने को पूरा करने की जरूरत है, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी. हमें बहुत कुछ हासिल करना है. हमारा संविधान समावेश की अवधारणा पर जोर देता है. हमने उन लोगों के लिए सबसे अच्छा करने की कोशिश की है, जिनके घरों में शौचालय या बिजली नहीं है. हमें और करने की जरूरत है. हम बहिष्करण को समावेश में बदलने की कोशिश कर रहे हैं. इसे ही मैं संविधान निर्माताओं का सपना पूरा करना कहता हूं.
पीएम ने कहा कि जब गरीबों को समानता और समान अवसर मिले तो इसे राष्ट्र निर्माण कहते हैं. दिव्यांगों के अधिकार, जब तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो यह अधिकारों को बढ़ाता है. यह कई बहनों की जीत है. सबका साथ, सबका विकास हमारा आदर्श वाक्य है. हम इसका सख्ती से पालन करते हैं.
उन्होंने कहा कि गुजरात में नर्मदा में सरदार पटेल बांध देखना चाहते थे. पंडित नेहरू ने इसका शिलान्यास किया. लेकिन पर्यावरण के नाम पर आंदोलन चलाया गया. अदालतों में भी मामला कई दशकों तक उलझा रहा, अदालतें भी आदेश जारी करने में हिचकिचाती रहीं.
औपनिवेशिक मानसिकता जारी है. भारत को पर्यावरण के नाम पर उपदेश दिए जाते हैं. भारत पर तरह तरह के दबाव बनाए जाते हैं. देश के भीतर भी कुछ लोग ऐसी मानसिकता वाले हैं. बोलने की आजादी के नाम पर कुछ भी करते हैं. ये औपनिवेशिक मानसिकता वाले देश के विकास में बाधा हैं, इनको दूर करना ही होगा.
पीएम मोदी ने कहा कि दुख की बात है कि हमारे देश में ऐसे लोग भी हैं, जो अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बिना सोचे समझे देश के विकास को रोक देते हैं. इसका खामियाजा ऐसे लोगों को नहीं भुगतना पड़ता है. लेकिन उन माताओं को झेलना पड़ता है जिनके पास अपने बच्चे के लिए बिजली नहीं है.