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नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार 10वें दिन गिरावट देखने को मिला। पेट्रोल की कीमतों में 21 की कटौती हुई है तो वहीं डीजल की कीमतों में 16 पैसे कमी देखनो को मिली है। बीते 10 दिनों की अगर बात करें तो पेट्रोल करीब एक रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हुआ है जबकि डीजल में 78 पैसे तक की कटौती देखने को मिली है। कटौती के बाद दिल्ली में पेट्रोल अब 77.42 रुपए प्रति लीटर मिलेगा। वहीं कोलकाता में 80.07 रुपए जबकि मुंबई में 85.24 रुपए और चेन्नई में 80.37 रुपए मिलेगा। डीजल के दामों में कटौती के बाद इसकी कीमत दिल्ली में 68.58 रुपए, कोलकाता में 71.13 रुपए, मुंबई में 73.02 रुपए और चेन्नई में 72.40 रुपए प्रति लीटर मिलेगी।
::/fulltext::नागपुर: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नागपुर में संघ के मुख्यालय में जाने और वहां पर संघ के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को भाषण देने के फैसले पर हर जगह चर्चा हो रही है. गुरुवार की शाम को उन्होंने जो भाषण दिया उसका हर कोई अपने-अपने हिसाब से मायने निकाल रहा है. इससे पहले पूरी कांग्रेस असहज नजर आ रही थी. यहां तक कि उनकी बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि उनका (डॉ.मुखर्जी) भाषण किसी को याद नहीं रहेगा हां, उनकी तस्वीर का इस्तेमाल जरूर किया जाएगा. लेकिन कुशल राजनेता मुखर्जी बिना किसी दबाव में आए संघ के कार्यक्रम में गए और अपने 'उच्चस्तरीय' भाषण के जरिये संघ को उसी के मच पर कई नसीहतें दें डालीं. प्रणब मुखर्जी अपना भाषण अंग्रेजी में दे रहे थे, मगर बीच-बीच में वह अपनी मातृभाषा बांग्ला के मुहावरों का इस्तेमाल भी कर रहे थे.
नई दिल्ली। सेना के नगरोटा शिविर पर आतंकवादी हमले की साजिश में गिरफ्तार एक आतंकवादी आशिक बाबा को हुर्रियत नेताओं की सिफारिश पर चार बार पाकिस्तान का वीजा दिया गया, जहां उसने जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों के साथ मिलकर हमले की साजिश रची।
हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए के प्रवक्ता ने गुरुवार को बताया कि तीन गिरफ्तार आतंकवादियों ने पूछताछ के दौरान यह अहम जानकारी दी। उन्होंने यह भी कबूला कि वे सभी पाकिस्तान स्थित जैश के तीन कमांडरों के संपर्क में थे और जैश कमांडर उन्हें सोशल मीडिया पर निरंतर निर्देश देते रहते थे। तीनों गिरफ्तार आतंकवादियों आशिक बाबा, तारिक अहमद डार और मुनीर उल हसन कादरी ने बताया कि वे जैश के मुजफ्फराबाद स्थित कमांडर मौलाना मुफ्ती अश्गर, रावलपिंडी में स्थित कमांडर कारी जरार, वसीम और अबू तालहा के संपर्क में थे।
ये जैश कमांडर उन्हें व्हाट्सएप के जरिए वॉयस और टेक्सट संदेश भेजते थे। अश्गर का भानजा वकास दक्षिण कश्मीर में जैश का कमांडर था और वह हाल ही में मुठभेड़ में मारा गया था। आतंकवादियों ने एनआईए को यह भी बताया कि आशिक बाबा को हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी, गनी भट और मौलाना उमर फारुख के सिफारिशी पत्रों पर 2015 और 17 के बीच में चार बार कानूनी तरीके से पाकिस्तान का वीजा दिया गया और वह वाघा चौकी के रास्ते पाकिस्तान गया। वहां उसने एक आईएसआई एजेंट से मंजूरी के बाद जैश के कमांडरों से मुलाकात की और नगरोटा हमले की साजिश में शामिल हुआ। जैश आतंकवादियों ने उसे हमले के बारे में जरूरी निर्देश दिए। उसे यह भी बताया गया कि हमलावर आतंकवादी घुसपैठ के बाद उसे कहां मिलेंगे और आगे उन्हें क्या करना है।
::/fulltext::नई दिल्ली - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने बहुप्रतिक्षित भाषण में राष्ट्रवाद पर एक लंबा आख्यान दिया। प्रणव मुखर्जी ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि वह नेशन (देश), नैशनलिज्म (राष्ट्रवाद) और पैट्रियॉटिज्म (देशभक्ति) पर बात करने आए हैं। प्रणव मुखर्जी ने कहा कि राष्ट्रवाद किसी धर्म या भाषा में नहीं बंटा है। पूर्व राष्ट्रपति अपने भाषण में भारतीय राज्य को प्राचीन महाजनपदों, मौर्य, गुप्त, मुगल और ब्रिटिश शासन से होते हुए आजाद भारत तक लेकर आए। मुखर्जी ने अपने भाषण में तिलक, टैगोर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू समेत अन्य विद्वानों को कोट करते हुए राष्ट्रवाद और देश पर अपनी राय रखी।
आपको बता दें कि प्रणव मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। कांग्रेस के कई नेताओं ने मुखर्जी को संघ के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का सुझाव दिया था। प्रणव मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस नेत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी कुछ ऐसी ही अपील की थी। इन सबके बावजूद मुखर्जी कार्यक्रम में शामिल हुए और देशभक्ति पर एक लंबा व्याख्यान दिया। संघ के कार्यक्रम में मौजूद स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आपलोग अनुशासित और ट्रेंड है, शांति और सौहार्द के लिए काम कीजिए।
मुखर्जी बोले, धर्म , हठ और असहिष्णुता के माध्यम से भारत को परिभाषित करना इसे कमजोर करेगा
पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा कि धर्म, मतभेद और असिहष्णुता से भारत को परिभाषित करने का हर प्रयास देश को कमजोर बनाएगा। मुखर्जी ने कहा कि असहिष्णुता भारतीय पहचान को कमजोर बनाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पहचान और भारतीय राष्ट्रवाद सार्वभौमिकता और सह-अस्तित्व से पैदा हुआ है। प्रणव मुखर्जी ने अपने संबोधन में प्राचीन भारत का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा समाज शुरू से खुला रहा है। सिल्क और स्पाइस रूट जैसे माध्यमों से संस्कृति, विचारों सबका आदान-प्रदान हुआ। मुखर्जी ने कहा कि भारत से होकर हिंदुत्व के प्रभाव वाला बौध धर्म सेंट्रल एशिया, चीन तक पहुंचा। उन्होंने मेगस्थनीज, फाहयान जैसे विदेशी यात्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी ने प्राचीन भारत के प्रशासन और बढ़िया इन्फ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की। पूर्व राष्ट्रपति ने प्राचीन भारत के एजुकेशन सिस्टम का जिक्र करते हुए तक्षशिला और नालंदा का नाम लिया और कहा कि प्राचीन भारत के यूनिवर्सिटी सिस्टम ने दुनिया पर राज किया।
यूरोपीय राष्ट्रवाद से प्राचीन हमारा राष्ट्रवाद: प्रणव मुखर्जी ने कहा कि 17वीं सदी में वेस्टफेलिया के समझौते के बाद अस्तित्व में आए यूरोपीय राज्यों से भी प्राचीन हमारा राष्ट्रवाद है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय विचारों से अलग भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटुंबकम पर आधारित है और हमने पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखा है। मुखर्जी ने कहा कि हमारे देश की राष्ट्रीय पहचान किसी खास धर्म, भाषा या संस्कृति से नहीं हो सकती। मुखर्जी ने प्राचीन भारत में महाजनपद से शुरू कर देश की एकता का जिक्र किया। इस क्रम में उन्हें मौर्य, गुप्त, मुस्लिम, कंपनी और ब्रिटिश शासन के समय के इतिहास का भी जिक्र किया। मुखर्जी ने कहा कि इन सबके बीच में एक बात याद रखनी चाहिए कि 2500 साल तक लगातार शासन बदलते रहे लेकिन 5000 सालों पुरानी हमारी सभ्यता नहीं टूटी, बची रही। मुखर्जी ने टैगोर की पंक्तियों को दोहराते हुए कहा कि मानवता की न जाने कितनी धाराएं पूरे विश्व से आईं और उस महासागर में समा गईं जिसे हम भारत कहते हैं। प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रवाद और देशभक्ति के संदर्भ में आजादी से पहले कांग्रेस के प्लैटफॉर्म से सुरेंद्र नाथ बनर्जी के अध्यक्षीय भाषण, तिलक के स्वराज, गांधी के राष्ट्रवाद और नेहरू की किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने अपनी किताब में लिखा है कि भारत का राष्ट्रवाद हिंदू, मुस्लिमस, सिख और दूसरे तमाम समूहों से मिलकर बनता है। पूर्व राष्ट्रपति ने आजादी के बाद राष्ट्रीय एकीकरण और राष्ट्रवाद में सरदार पटेल के प्रयासों को भी याद किया।
भारत की आत्मा बहुलतावाद और सहिष्णुता में निहित: मुखर्जी
मुखर्जी ने कहा कि आजादी के बाद मिला लोकतंत्र हमारे लिए गिफ्ट नहीं है। भारतीय संविधान केवल प्रशासन के लिए ही नहीं है बल्कि करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधि है। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान अस्तित्व में आया। हमने संप्रभु लोकतांत्रिक राज्य में भरोसा जताया। हमारे यहां संवैधानिक देशभक्ति है। मुखर्जी ने कहा कि यह महान आश्चर्य है कि 1.3 अरब लोग, जो 122 से अधिक भाषाएं बोलते हैं, 1600 बोलियों का उपयोग करते हैं, सात प्रमुख धर्मों की प्रैक्टिस करते हैं और तीन प्रमुख जातीय समूहों से आते हैं, एक सिस्टम, एक झंडे, और एक पहचान भारतीयता के अधीन रहते हैं।
मुखर्जी ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता हमारे विश्वास की बात है। हम बहस करते हैं, संवाद जरूरी है। समस्याओं के समाधान की समझ बातचीत से ही विकसित होगी। मुखर्जी ने कहा कि आज हमारे चारों तरफ हिंसा बढ़ रही है। सामाजिक तानाबाना टूट रहा है, हम हिंसा देख रहे हैं। हम लोगों को पब्लिक डिस्कोर्स को हिंसा से मुक्त कराना होगा। अहिंसा वाला समाज ही लोगों की लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित करेगा। मुखर्जी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था तो तेजी से बढ़ रही है लेकिन नागरिकों को खुशी नहीं मिल रही है। हम हैपीनेस रैंकिंग में 133वें नंबर पर हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अगर आप संसद में जाएंगे तो गेट नंबर 6 पर लिफ्ट के ऊपर संस्कृत में एक श्लोक लिखा है। उन्होंने वहां लिखे कौटिल्य के श्लोक 'प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां तु हिते हितम, नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम' का जिक्र करते हुए कहा कि प्रजा के हित और सुख में भी राजा का सुख निहित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक लोकतंत्र के पैदा होने से बहुत पहले कौटिल्य ने लोगों को केंद्र में रखा।
डाक सेवकों को मिलेगा वेतन आयोग के हिसाब से पारितोषिक.
नई दिल्ली: सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) - ग्रामीण डाक सेवकों ने हाल ही में करीब 10 दिनों तक हड़ताल की थी और सरकार से आश्वासन के बाद तीन लाख से ज्यादा डाक सेवकों ने हड़ताल वापस ले ली थी. अब बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में डाक विभाग से जुड़े इन पार्ट टाइम कर्मियों के पारितोषिक में सातवें वेतन आयोग के हिसाब से 56 फीसदी तक का इजाफा किया गया है. डाक सेवकों का वेतन और भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. डाक सेवकों को 1 जनवरी 2016 से एरियर प्रदान किया जाएगा. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को डाक विभाग के ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) के वेतन भत्तों में संशोधन को मंजूरी दी है. वेतन भत्तों में संशोधन के लिए वर्ष 2018-19 के दौरान 1257.75 करोड़ रुपये (860.95 करोड़ रुपये के गैर-आवर्ती खर्च 396.80 करोड़ रुपये के आवर्ती खर्च) खर्च होने का अनुमान है.
वेतन भत्तों में इस संशोधन से 3.07 लाख ग्रामीण डाक सेवक लाभान्वित होंगे.
विवरण :
कार्यान्वयन रणनीति एवं लक्ष्य
ग्रामीण डाक सेवकों के वेतन भत्तों में संशोधन किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल एवं सस्ती बुनियादी डाक सुविधाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी. प्रस्तावित वेतन वृद्धि से वे अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने में समर्थ होंगे. डाकघरों की ग्रामीण शाखा गांवों एवं दूरदराज के क्षेत्रों में संचार एवं वित्तीय सेवाओं का आधार है. ग्राहकों को भुगतान के लिए पोस्ट मास्टर को काफी रकम का हिसाब रखना पड़ता है और इसलिए उनके काम की जिम्मेदारी पहले से ही निर्धारित है. इस वेतन वृद्धि से उनमें जिम्मेदारी का भाव और बढ़ेगा. कुल मिलाकर ग्रामीण आबादी के बीच वित्तीय समावेशीकरण की प्रक्रिया में भारतीय डाक भुगतान बैंक (आईपीपीबी), सीडीएस नेटवर्क की अहम भूमिका होने की उम्मीद है.
पृष्ठभूमि :
भारतीय डाक विभाग में अतिरिक्त विभागीय व्यवस्था की स्थापना 150 वर्ष पहले उन ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी आर्थिक एवं कुशल डाक सेवा मुहैया कराने के लिए की गई थी जहां पूर्णकालिक कर्मचारियों को बहाल करने का कोई औचित्य नहीं था. एक लाख उनतीस हजार तीन सौ छियालिस (1,29,346) अतिरिक्त विभागीय डाक शाखा का संचालन मुख्य तौर पर ग्रामीण डाक सेवक ब्रांच पोस्ट मास्टर के द्वारा किया जा रहा है. साथ ही, ग्रामीण डाक सेवक ब्रांच पोस्ट मास्टर के अलावा शाखा, उप एवं मुख्य डाक घरों में भी काम करते हैं. ग्रामीण डाक सेवकों को बहाल करने की मुख्य विशेषता यह है कि वे तीन से पांच घंटे प्रतिदिन अंशकालिक कार्य करते हैं और इससे प्राप्त आय उनके मुख्य आय का पूरक है जो उनके लिए अपने परिवार का भरण पोषण करने का एक पर्याप्त साधन है. वे 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रह सकेंगे.