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प्लास्टिक धीरे धीरे हर आम जिंदगी की हिस्सा बनता जा रहा है। चाहे आम दिन की शुरुआत ब्रश से करें या नहाने के लिए टैप वाटर। सब जगह धीरे धीरे प्लास्टिक हमारे जीवन में अपना दबदबा कायम करता जा रहा है। जो कि हमारे लिए घबराने की बात है। पर्यावरणविदों की मानें तो माइक्रो प्लास्टिक या प्लास्टिक के सूक्ष्म कण मिट्टी में, नलकों से, पानी की बोतल , बीयर की बोतल यहां तक की हवा में घुलकर सांसो के जरिए हमारे स्वास्थय के लिए हानिकारक होते जा रहे हैं। 2015 में हुए एक रिसर्च के अनुसार दुनियाभर में 6.3 बिलियन टन के आसपास प्लास्टिक वेस्ट का उत्पादन हो चुका है और इससे भी खतरनाक बात ये है कि इस प्लास्टिक वेस्ट में से 90 प्रतिशत कचरे और कबाड़ को अगले 500 साल तक नष्ट नहीं किया जा सकता है।अगर समय रहते प्लास्टिक के प्रदूषण को नहीं रोका गया तो अगले 30 सालों में प्लास्टिक से फैलने वाला ये प्रदूषण दोगुना हो जाएगा और समुद्र में मछलियों से ज्यादा हमें प्लास्टिक तैरता हुआ नजर आएगां।
इस बार विश्व पर्यावरण दिवस यानी World Environment Day पर पूरी दुनिया ने प्लास्टिक के खतरों को समझते हुए प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम छेड़ी है। भारत भी प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ अपने प्रयास शुरु कर दिए है। बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया पर #BeatPlasticPollution के नाम से कैंपेन के जरिए फैंस को प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के लिए कहा है। इस मौके पर हम भी आपकों प्लास्टिक से फैल रहे प्रदूषण के बारे बता रहे है कि अगर समय रहते इस प्रदूषण को नहीं रोका गया तो आने वाला मंजर और भी भयावह हो सकता है। आइए जानते प्लास्टिक पॉल्यूशन से जुड़े कुछ फैक्ट और इसके दुष्परिणामों के बारे में।
जमीन या पानी में प्लास्टिक उत्पादों के ढेर को प्लास्टिक प्रदूषण कहा जाता है प्लास्टिक प्रदूषण का वन्यजीव, वन्यजीव आवास और मनुष्य पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक प्रदूषण भूमि, वायु, जलमार्ग और महासागरों को प्रभावित करता है। प्लास्टिक मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थों से उत्सर्जित सिंथेटिक रेजिन से बना है। रेजिन में प्लास्टिक मोनोमर्स अमोनिया और बेंजीन का संयोजन करके बनाया जाता है। प्लास्टिक में क्लोरीन, फ्लोरीन, कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और सल्फर के अणु शामिल हैं। 40 माइक्रोन से कम तापमान पर प्लास्टिक बैग बायोडिग्रेडेबल नहीं हैं। वे हमेशा के लिए पर्यावरण में बने रहेंगे। लंबे समय तक अपर्याप्त नहीं होने के अलावा प्लास्टिक के कई दुष्प्रभाव भी होते हैं जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
रंग बिरंगे प्लास्टिक के खिलौनों में कैमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो उनके लिए हानिकारक होता है। इन खिलौनों में आर्सेनिक और सीसा मिला हुआ होता है। खेलते हुए बच्चें इन खिलौनों को छूने के बाद सीधा मुंह में हाथ डालते है जो जिससे ये केमिकल उनके शरीर में पहुंचते है। इस वजह से उनको कैंसर तक हो सकता है।
अगर आप प्लास्टिक बोतल में बंद मिनरल पानी के आदी है, और सोचते है कि बोतल बंद ये पानी मिनरल युक्त और सुरक्षित है तो आप गलत हैं। हाल ही में हुए एक रिसर्च के अनुसार चाइना, ब्राजील, इंडोनेशियां, यूएस समेत 9 देशों में बेची जाने वाली 11 अलग अलग ब्रांड की करीब 259 पैकेज्ड बोतल की जांच की हैं। इस शोध में उन्होंने पाया है कि भारत समेत दुनियाभर में मिलने वाले मशहूर पैकेज्ड मिनरल पानी में 93% तक प्लास्टिक के छोटे छोटे कण शामिल थे।
पहले के जमाने में लोग स्टील या दूसरी धातु से बने बोतल या बर्तन में दूध या पानी पीना पसंद करते थे। लेकिन सस्ते और अट्रेक्टिव होने के कारण लोगों ने प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना शुरु कर दिया जो कि आपके सेहत के लिए खतरनाक है। अगर आप प्लास्टिक के बोतल से पानी पीते हैं, तो इसके कारण कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग, गर्भवती मां और बच्चे को खतरे के अलावा कई दूसरी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं।
एक रिसर्च के अनुसार बीयर बनाने में भी माइक्रो प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है। ये रिसर्च प्लास्टिक पॉल्यूशन पर रिसर्च करने वाली टीम ने किया है। उन्होंने बीयर के कुछ सैम्पल पर रिसर्च करके पाया कि प्रति लीटर बीयर की बोतल में 4.05 मानव निर्मित कण के साथ, ज्यादातर प्लास्टिक फाइबर मौजूद थे। यदि आप हर दिन एक बीयर पीते हैं तो सालाना 520 कणों को आप अपने शरीर में उतारते हैं।
आपको शायद ना पता हो लेकिन प्लास्टिक की थैलियां जहरीले केमिकल्स से मिल कर बनाई जाती हैं। इन्हें बनाने में जिन कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है उनसे बीमारियों के साथ साथ कई डिसऑडर्स भी हो सकते हैं।
* जब आप बाजार में खरीदारी करते हैं तो अपने साथ कपड़े से बना एक जूट या बैग का इस्तेमाल करें।
* प्लास्टिक की बोतल की जगह स्टील की बोतल में पानी पीएं।
* रि-साइकिल करके प्लास्टिक से बनाए जाने वाले प्रॉडक्ट का इस्तेमाल करें।
* प्लास्टिक के खिलौनें न खरीदें।
* प्लास्टिक वेस्ट को कहीं भी ऐसे न फैंके, प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या की गंभीरता को समझते हुए इसे डस्टबिन में फैंके। पानी या भूमि पर प्लास्टिक न फैंके
प्लास्टिक कचरे के कुप्रबंधन में चीन का नाम सबसे ऊपर है, जो कि 8.82 मिलियन मीट्रिक टन का उत्पादन करता है। प्लास्टिक की बर्बादी के प्रबंधन में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत पांचवें स्थान पर है। पिछले एक दशक में प्लास्टिक की बिक्री में काफी तेजी हुई है। एक मिनट में एक मिलियन प्लास्टिक की बोतलें खरीदी और बेची जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हर एक मिनट में प्लास्टिक के कबाड़ से भरा ट्रक समुद्र में डाला जाता है। 2030 तक ये संख्या बढ़कर दो ट्रक तक पहुंच जाएंगी और 2050 तक चार ट्रक। आप मानेंगे नहीं कि भारत में हर साल 30 टाइटैनिक जहाज के वजन के बराबर प्लास्टिक वेस्ट का उत्पादन होता है। जिसमें से यह वेस्ट उत्पादन करने में महाराष्ट्र पहले और गुजरात दूसरे नम्बर पर है।
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नई दिल्ली नोटबंदी के बाद देश भर में ऐसी करीब 73,000 कंपनियों ने 24,000 करोड़ रुपये की राशि बैंकों में जमा कराई, जिनका रजिस्ट्रेशन कंपनी रजिस्ट्रार ने रद्द कर दिया था। नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा राशि को लेकर सरकार की ओर से जारी डेटा में यह बात कही गई है। ब्लैक मनी के फ्लो को रोकने और अवैध एवं बेनामी संपत्तियों पर शिकंजा कसने के मकसद से कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था। इन सभी फर्म्स की कोई बिजनस ऐक्टिविटी नहीं थी, ऐसे में सरकार ने ब्लैक मनी के ट्रांजैक्शन में शामिल होने और बेनामी संपत्ति बनाने की आशंका के चलते इनका रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था। इनमें से ज्यादातर कंपनियों पर अवैध रूप से फंड जुटाने और हेराफेरी करने का आरोप है। मंत्रालय की ओर से जुटाए गए डेटा के मुताबिक जिन 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया था, उनमें से 1.68 फर्म्स के खाते में नोटबंदी के बाद कैश जमा किया गया। मंत्रालय ने अपने एक दस्तावेज में कहा, 'जिस कंपनियों ने कैश जमा कराया था। उनमें से 73,000 ने अपने खातों में 24,000 करोड़ रुपये जमा कराए। अलग-अलग बैंकों से इन कंपनियों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।'
मंत्रालय के बीते 4 सालों के कामकाज का ब्योरा देने वाले डॉक्युमेंट में यह भी बताया गया है कि ऐसी 68 कंपनियों के खिलाफ जांच की जा रही है। सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस ऐसी 19 कंपनियों की जांच कर रहा है, जबकि कंपनी रजिस्ट्रार की ओर से ऐसी 49 फर्म्स के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
नवंबर, 2016 में केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों का प्रचलन समाप्त कर दिया था। सरकार का कहना था कि ब्लैक मनी को बाहर निकालने और आतंकियों एवं माओवादियों की फंडिंग पर चोट पहुंचाने के लिए ऐसा फैसला लिया गया है। कंपनीज ऐक्ट के मुताबिक सरकार विभिन्न आधारों पर किसी भी कंपनी के रजिस्ट्रेशन को किसी भी वक्त कैंसल कर सकती है।
बुधवार को 1 पैसे तक सस्ता होने के बाद आज फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है
नई दिल्ली । पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली है। बुधवार को 1 पैसा सस्ता होने से बाद गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 7 पैसे प्रति लीटर की गिरावट आई है। वहीं डीजल भी 5 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है। बीते दिन किसी तकनीकी खामी के कारण इंडियन ऑयल के पोर्टल पर रेट कार्ड में एक लीटर पेट्रोल 60 पैसे तक सस्ता दिखने लगा था। हालांकि कुछ ही देर बाद खुद की इसे तकनीकी खामी बता इसे दुरुस्त करा लिया। गौरतलब है कि देश के तमाम शहरों में पेट्रोल डीजल की कीमतें 14 मई 2018 से 29 मई 2018 तक लगातार बढ़ी हैं। हालांकि सरकार यह लगातार कह रही है कि वो पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी को राहत देने के लिए एक दीर्घकालिक समाधान तलाश रही है।
मेट्रो शहरों में आज पेट्रोल के दाम: आज राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल के दाम 78.35 रुपये हो गए हैं, जो कि बीते दिन के मुकाबले (78.42 रुपये प्रति लीटर) कम कीमत है। वहीं मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत घटकर 86.16 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
मेट्रो शहरों में आज डीजल के दाम: मेट्रो शहरों में डीजल की प्रति लीटर कीमत में भी कमी आई है। दिल्ली मे एक लीटर डीजल की कीमत 69.25 रुपये हो गई है, जबकि बीते दिन यह कीमत 69.30 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं मुंबई में दाम 73.73 रुपये प्रति लीटर हैं
::/fulltext::श्रीनगर: रमजान के पाक महीने में एकतरफा संघर्ष विराम से कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान भले ही थम गया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवादी समूहों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में इजाफा होने की चेतावनी दी है. यह संख्या अब 80 के पार पहुंच गR है और नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार कई ओर से घुसपैठ की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है. सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के अति संवेदनशील शोपियां और पुलवामा जिलों में आईएसआईएस-कश्मीर और अल-कायदा की सहयोगी होने का दावा करने वाले अंसार गजवात-उल-हिंद जैसे आतंवकादी संगठनों समेत कई आतंकवादी समूहों में अधिक से अधिक युवाओं का जुड़ना जारी है.
मई में 20 युवक हुए शामिल
अधिकारियों ने बताया कि मई के महीने में कम से कम 20 से अधिक युवा आतंकवादी समूहों में शामिल हुए हैं, इनमें सरकारी पॉलीटेक्निक से डिप्लोमा कर रहा चतुर्थ सेमेस्टर का छात्र रऊफ भी शामिल है. रऊफ गांदरबल का रहने वाला है. उन्होंने बताया कि पेशे से यूनानी डॉक्टर और आईपीएस अधिकारी इनामुलहक मेंगनू के भाई के शोपियां से लापता होने की रिपोर्ट है और आशंका है कि वह भी आतंकवादी समूह में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस साल अप्रैल अंत तक यह आंकड़ा 45 था.
अन्य 16 लोग भी लापता
अधिकारियों ने बताया कि अन्य 16 लोगों के भी लापता होने की रिपोर्ट मिली है, जो मुख्यत : इन्हीं दोनों जिलों से हैं. बहरहाल ये सभी आतंकवादी समूहों में शामिल हुए हैं या नहीं इसकी जांच की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि घुसपैठ की घटनाएं भी बढ़ी हैं और कुछ आतंकवादी कश्मीर घाटी में एलओसी और जम्मू क्षेत्र के पुंछ एवं राजौरी जिलों से घुसपैठ करने में सफल रहे. इससे सुरक्षा बलों के लिए चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है.
2018 सबसे खराब साल!
अधिकारियों के मुताबिक 2018 विभिन्न आतंकी समूहों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या के मामले में सबसे खराब साल बनने जा रहा है क्योंकि इस साल मई तक 81 युवक आतंकी संगठनों का हिस्सा बने हैं. 2017 में जम्मू-कश्मीर के कुल 126 युवाओं ने बंदूक उठाई थी. राज्य की विधानसभा में पेश किए गए हालिया आंकड़ों के मुताबिक 2010 के बाद यह सर्वाधिक संख्या है. 2010-13 की तुलना में 2014 के बाद से घाटी में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ी है जिन्होंने हथियार उठाकर आतंकी समूहों का रास्ता पकड़ा है.
आतंकविरोधी अभियानों के बावजूद बढ़ी संख्या
2010-13 तक क्रमशः 54, 23, 21 और 6 युवाओं ने हथियार उठाए थे. 2014 में यह संख्या 53 हुई जबकि 2015 में बढ़कर 66 हो गई. 2016 में इसने सर्वोच्च (88) स्थिति को छुआ. जम्मू-कश्मीर सीआईडी द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए सफल आतंकविरोधी अभियानों के बावजूद स्थानीय आतंकवादियों की संख्या बढ़ी है.