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पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने बुधवार को सिकंदरपुर स्थित एक श्मशान घाट से कंकाल बरामद कर उसे फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले गई. मुजफ्फरपुर बालिका गृह में रह रही लड़कियों में से एक बच्ची ने आरोप लगाया था कि वहां के कर्मचारियों द्वारा उनके एक साथ रह रही एक लड़की की हत्या कर उसे बालिका गृह परिसर में दफना दिया गया था.
इस आरोप पर पुलिस ने जुलाई में परिसर के अंदर खुदवाई करायी थी लेकिन कुछ भी संदिग्ध चीज बरामद नहीं हुई. ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले में गिरफ्तार विजय से प्राप्त जानाकारी पर सीबीआई ने महाकाल-महाशक्ति मंदिर के पीछे खुदाई करवाया. विजय इस मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के साथ काम करता था. मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा राज्य सरकार को सौंपी गयी सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट के आधार पर सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई के दौरान ब्रजेश द्वारा संचालित मुजफ्फरपुर बालिका गृह में लडकियों का यौन शोषण किए जाने का मामला प्रकाश में आया था.
गुजरात के अमरेली जिले में स्थित मशहूर गिर अभयारण्य में शेरों की मौत का सिलसिला जारी है। पिछले 18 दिनों में खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और प्रोटोजोवा संक्रमण के कारण 23 शेरों की मौत हो चुकी है। 26 शेरों वाले इस अभायरण्य में अब केवल तीन ही शेर बचे हैं। शेरों की मौत से गिर प्रशासन सकते में है। बचे हुए शेरों को बचाने के लिए प्रशासन हरसंभव कोशिश में लगा हुआ है। चार शेरों में वायरस की उपस्थिति के बाद शेरों को संक्रमण से बचाने के लिए अमेरिका से विशेष इंजेक्शन मंगाए जा रहे हैं, वहीं कुछ शेरों को सेमरणी इलाके से रेस्क्यू कर जामवाला इलाके में भेजा गया है।
वनमंत्री गणपत सिंह वसावा ने दो दिन पहले ही जूनागढ़ के पास सासण गिर का दौरा कर मृत शेरों के बारे में जानकारी हासिल की थी। एक अधिकारी ने कहा कि गिर में शेरों की मौत की मुख्य वजह शेरों के बीच लड़ाई और लीवर किडनी में संक्रमण है। वन विभाग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि दलखनिया के अलावा कहीं और ये मौतें नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि वायरस के खतरे को देखते हुए समार्दी से 31 शेरों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। सभी का चेकअप किया गया। 600 शेरों में से 9 बीमार पाए गए, उनमें से 4 का वहीं उपचार किया गया, जबकि 5 को उपचार के लिए रेस्क्यू किया गया है।
क्या है सीडीवी वायरस और यह कैसे फैलता है : कैनाइन डिस्टेंपर बेहद खतरनाक संक्रामक वायरस है। इसे सीडीवी भी कहा जाता है। इस बीमारी से ग्रसित जानवरों का बचना बेहद मुश्किल होता है। यह बीमारी मुख्यत: कुत्तों में पाई जाती है। हालांकि कैनाइन फैमिली में शामिल रकून, भेड़िया और लोमड़ी में भी यह बीमारी पाई जाती है। कुत्तों के जरिए यह वायरस दूसरों जानवरों में भी फैल जाता है।
इसके अलावा यह वायरस हवा तथा सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर इस वायरस से ग्रसित किसी जानवर के संपर्क में आने से भी फैलता है। बीमारी के लक्षण इस वायरस से ग्रसित होने के करीब एक सप्ताह में सामने आते हैं। यह बीमारी खराब वैक्सीन से भी फैल सकती है। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का पता बॉयोकेमिकल टेस्ट और यूरिन की जांच से चलता है।