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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में पंपोश होटल में भीषण आग लगी है. बताया जा रहा है कि इसी होटल में मीडिया से जुड़े कई दफ्तर भी हैं. यह आग काफी भयावह है. हालांकि, दमकल की पांच गाड़ियां आग पर काबू पाने के लिए मौके पर मौजूद हैं. अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. पंपोश होटल 6 मंजिला इमारत है.
कुमारस्वामी ने संवाददाताओं से कहा, ‘चाहे वह रिसोर्ट अथवा कुटिया तैयार रखें, मैं सबकुछ के लिए तैयार हूं’. उन्होंने कहा, ‘मौजूदा समय में पैसे का भुगतान अग्रिम के तौर पर किया जा रहा है.
खास बातें
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी (H. D. Kumaraswamy) ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए शुक्रवार को दावा किया कि वह उनकी सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है. मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही कुछ भाजपा के ‘‘कुछ सरगनाओं’’ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि वे लोग सरकार गिराने के लिए कांग्रेस और जद (एस) के विधायकों को रिश्वत देने का प्रयास कर रहे हैं. कांग्रेस में आंतरिक असंतोष के बाद प्रदेश में कांग्रेस और जद (एस) के विधायकों का स्वागत करने के लिए रिसोर्ट तैयार होने संबंधी मीडिया में आयी खबरों के बीच कुमारस्वामी ने दृढ़तापूर्वक कहा कि वह सरकार के समक्ष आयी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं.
कुमारस्वामी ने संवाददाताओं से कहा, ‘चाहे वह रिसोर्ट अथवा कुटिया तैयार रखें, मैं सबकुछ के लिए तैयार हूं’. उन्होंने कहा, ‘मौजूदा समय में पैसे का भुगतान अग्रिम के तौर पर किया जा रहा है. मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहूंगा. आपको इसके बारे में बाद में पता चल जाएगा’. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ ‘‘सरगना’’ हैं जो उनकी सरकार को गिराने में लग गए हैं. कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘क्या मुझे पता नहीं है ? क्या मैं चुप रहूंगा? क्या मुझे नहीं मालूम है कि पैसे कहां से एकत्र किये जा रहे हैं, और धन को एकत्र करने के पीछे सरगना कौन है. मैने कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक उपायों को पहले से ही शुरू कर दिया है. मैं एक मजबूत और स्थिर सरकार देने के लिए हर निर्णय करूंगा’’. किसी का नाम लिये बगैर कुमारस्वामी ने कहा कि एक सरगना ने पत्नी और बेटे की हत्या के लिए एक कॉफी प्लांटर को उकसाया था जबकि दूसरे ने नौ साल पहले नगर निगम कार्यालय में आग लगा दी थी.
उन्होंने दावा किया कि सरकार गिराने के लिए यही लोग पैसे एकत्र कर रहे हैं. यह पूछने पर कि सरकार गिराने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, कुमारस्वामी ने कहा कि जो कुछ हो रहा है उससे वह फिलहाल प्रभावित नहीं हो रहे हैं और बिल्कुल शांतिप्रद महसूस कर रहे हैं. उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि वह सरकार गिरने के बारे में एक के बाद एक समय सीमा निर्धारित करते हैं . उन्होंने कहा, ‘‘नयी समय सीमा सोमवार को है. यह बढ़ कर दो अक्तूबर हो जाएगी और उसके बाद दशहरा. मुझे लगता है कि यह समय सीमा बढ़ती रहेगी’’. दूसरी तरफ, भाजपा ने मुख्यमंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी कभी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं रही है.
खास बातें
नई दिल्ली: यूपी में नई पेंशन व्यवस्था(एनपीएस) में भारी गोलमाल का मामला सामने आया है. तीन साल में राज्य कर्मचारियों के वेतन से कितनी धनराशि काटी गई और सरकार ने कितना जमा किया, इसका कोई फंड ही नहीं उपलब्ध है. बाद के वर्षों में जो धनराशि कटी भी तो उसे ठीक से संबंधित खाते में जमा भी नहीं किया गया. पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म कर एक अप्रैल 2005 से लागू नई पेंशन व्यवस्था पर कैग की पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ है. नई स्कीम के तहत कर्मचारियों को अपनी बेसिक सेलरी और महंगाई भत्ते का दस प्रतिशत अंश देना पडता है. इतनी ही धनराशि राज्य सरकार भी देती है. इस प्रकार कर्मचारी और सरकार दोनों के अंश को नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड(NSDL) खाते में रखने की व्यवस्था है. इसे फंड मैनेजर बनाया गया है. इस प्रकार धनराशि कटौती और उसके उचित खाते में रख-रखाव में लापरवाही से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलने में दिक्कत आ सकती है
सीएजी की जांच में पता चला कि नई पेंशन योजना के तहत उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों के वेतन से 2005 से 2008 तक हुई कटौती की धनराशि का ब्यौरा ही उपलब्ध ही नहीं है. कैग ने वर्ष 2018 की रिपोर्ट नंबर एक में कहा है कि इससे यह नहीं पता चल सका है कि कितनी धनराशि सरकार ने काटी और कितना अंशदान सरकार ने किया. ब्यौरा उपलब्ध न होने से यह भी नहीं पता चला कि अगर कटौती हुई तो उससे अर्जित एनएसडीएल में जमा हुआ या नहीं. नई स्कीम के तहत कर्मचारियों के वेतन से हुई कटौती और राज्यांश का निवेश करने की बात है. कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर मार्केट में शेयर की कीमत के हिसाब से लाभ मिलना है. मगर वर्ष 2005 से 2008 के बीच कितनी धनराशि का निवेश हुआ यह भी नहीं पता चल सका.
बैंकिंग क्षेत्र के संकट की मूल वजह बांड बाजार की समस्या है: कैग
पैसा काटा, मगर खाते में भेजा नहीं
यूं तो यह कटौती एक अप्रैल 2005 से नियुक्त होने वाले कर्मियों के खाते शुरू हो जानी थी, मगर कैग को तीन साल तक कटौती का ब्यौरा ही उपलब्ध नहीं मिला. कैग की पड़ताल में पता चला कि वर्ष 2008-09 के बीच सरकारी कर्मचारियों की पेंशन के लिए वेतन से 2830 करोड़ रुपये की कटौती हुई. जिसके बदले में सिर्फ 2247 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने अंशदान किया. खास बात है कि कर्मचारी और सरकारी अंश मिलाकर 2008-09 से लेकर 2016-17 के बीच कुल 5660 करोड़ रुपये जुटे. इसमें से सिर्फ 5001.71 करोड़ रुपये ही सरकार ने पेंशन वाले खाते में भेजा. 545.68 करोड़ रुपये भेजा ही नहीं गया.कैग ने रिपोर्ट में कहा कि सबसे गंभीर बात रही कि 2015-16 में कर्मचारियों के अंश जो 636.51 करोड़ था, वह 2016-17 में 199.24 करोड़ हो गया. इससे पता चलता है कि पैसा ट्रांसफर करने में अनियमितता हुई.
देखिए, कैग की वर्ष 2018 की रिपोर्ट नंबर एक, जिसमें नई पेंशन व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों का खुलासा किया है.
कैग की सिफारिश
देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी सीएजी ने नई पेंशन योजना में यूपी में हुए घपले पर एक्शन की सिफारिश की है. राज्य सरकार से कहा है कि इस बाबत तत्काल कार्रवाई की जाए. सभी कर्मचारियों को नई पेंशन स्कीम से जोड़ते हुए यसुनिश्चित किया जाए कि उनके वेतन से जितनी धनराशि कट रही है और जितनी धनराशि सरकार जोड़ रही है, वह समय से NSDL खाते में पहुंचे.
बता दें कि नई व्यवस्था के तहत वेतन से होने वाली 10 फीसदी कटौती को सरकार बाजार में लगाने की बात कहती है, फिर उससे होने वाले लाभ के आधार पर ही पेंशन कर्मियों को मिलेगी. राज्य कर्मी इस व्यवस्था को घाटे का सौदा मानते हैं. उनका कहना है कि पुरानी व्यवस्था के तहत सब कुछ निश्चित होता था. जीपीएफ की सुविधा होती थी. जीपीएफ की धनराशि पर लोन भी ले सकते थे. मगर नई पेंशन व्यवस्था के तहत हानि-लाभ सब बाजार पर निर्भर करता है. अब वे लोन भी नहीं निकाल सकते. बाजार में अगर शेयर गिरेंगे तो नुकसान होगा.
2013 के विधान सभा चुनाव से पहले वसुंधरा राजे ने एलान किया था कि उनकी सरकार बनी तो राज्य में 15 लाख लोगों को नौकरियां दी जाएंगी. तब युवाओं ने उन्हें खूब वोट दिया था.
राजस्थान. राजस्थान में इस साल के अंत तक विधान सभा चुनाव होने हैं. उससे पहले सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियां गिना रहा है, वहीं विपक्ष उसकी पोल खोल रहा है लेकिन इस बार सरकारी दावों की पोल सीएजी की रिपोर्ट में हुआ है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कुछ दिनों पहले ही एक चुनावी रैली में दावा किया कि उनके शासनकाल में कुल 16 लाख युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देकर रोजगार दिलवाए गए. सीएम ने दावा किया कि उनकी सरकार ने बेरोजगारों को 3.25 लाख सरकारी नौकरियां दीं. इनमें से 1.35 लाख नौकरियां अभी सरकारी प्रक्रिया में है. इतना ही नहीं सीएम ने दावा किया कि उनकी सरकार ने राज्य में करीब 20 लाख लोगों को मुद्रा योजना के जरिए स्वरोजगार मुहैया कराए हैं. इनमें से मीणा समुदाय के लोगों को भी लाभ पहुंचा है.
सीएम के दावों पर सीएजी रिपोर्ट में उंगली उठाई गई है. इस महीने राजस्थान विधान सभा के पटल पर रखी गई इस रिपोर्ट में राजस्थान स्किल एंड लाइवलीहुड डेवलपमेंट कॉपोरेशन द्वारा साल 2014 से 2017 के बीच उपलब्ध कराए गए प्लेसमेंट के आंकड़ों को संदेहास्पद बताया गया है. सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि इस दौरान कुल 1 लाख 27 हजार 817 युवाओं ने स्किल डेपलमेंट की ट्रेनिंग ली, इनमें से 42 हजार 758 को प्लेसमेंट मिला लेकिन सीएजी की तरफ से किए गए भौतिक सत्यापन में मात्र 9 हजार 904 लोगों का ही असली रुप से प्लेसमेंट हुआ पाया गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में राज्य में अविलंब स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देकर बेरोजगारी दूसर करने की सलाह सरकार को दी है.
राजस्थान बीजेपी के नेता और शिव से विधायक मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस ज्वाइन करने की खबरें तेज हो गई हैं. मानवेंद्र वाजपेयी सरकार में रक्षामंत्री और बीजेपी के बड़े नेता रहे जसवंत सिंह के बेटे हैं.
बता दें कि 2013 के विधान सभा चुनाव से पहले वसुंधरा राजे ने एलान किया था कि उनकी सरकार बनी तो राज्य में 15 लाख लोगों को नौकरियां दी जाएंगी. तब युवाओं ने उन्हें खूब वोट दिया था. 200 सदस्यों वाली विधानसभा में तब बीजेपी को 163 सीटें मिली थीं लेकिन ऐसा नहीं हुआ. विपक्षी कांग्रेस सीएम पर झूठ बोलने का आरोप लगा रही है. इसके साथ ही बेरोजगारी को कांग्रेस ने चुनावी मुद्दा बना लिया है. वसुंधरा सरकार ने उन लोगों को भी रोजगार के लाभार्थियों की सूची में शामिल कर लिया है जो अपने बूते किसी प्रकार कहीं सब्जी बेच रहे हैं या किसी अन्य माध्यम से जीवकोपार्जन कर रहे हैं. इनमें उन लोगों की बड़ी संख्या शामिल है जिन्होंने साल 2017 में विधान सभा सचिवालय में चपरासी के 18 पदों के लिए आवेदन दिया था. इस पद के लिए 13,000 बेरोजगारों ने आवेदन दिया था. इनमें लॉ ग्रेजुएट से लेकर एमए और इंजीनियरिंग कर चुके बेरोजगार युवा शामिल थे. राजभव में भी पांच चपरासी के लिए 23,000 बेरोजगारों ने आवेदन दिए थे. इससे साफ जाहिर होता है कि राज्य में बेरोजगारी का आलम कैसा है.
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